उज्जैन-जावरा रोड निर्माण के लिए भूमि अर्जन प्रक्रिया जारी है, लेकिन मुआवजे को लेकर किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी के चलते रविवार को किसान एमपीआरडीसी (MPRDC) कार्यालय पहुंचे और वहां अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया जारी है, जबकि किसान उचित और स्पष्ट मुआवजे की मांग कर रहे हैं। भूमि अर्जन को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया फिलहाल जारी है, लेकिन मुआवजे को लेकर स्पष्ट जानकारी न मिलने से करीब 100 किसान उज्जैन-जावरा रोड क्षेत्र से एकत्र होकर एमपीआरडीसी कार्यालय पहुंचे। रविवार होने के बावजूद किसानों को आशंका थी कि यहां संबंधित कार्य जारी है और जो अवार्ड पारित होना है, उसकी जानकारी उन्हें नहीं दी जा रही है। किसानों ने अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन कुछ अधिकारियों से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण वे नाराज नजर आए। हालांकि, बाद में अन्य अधिकारियों ने उन्हें समझाइश दी और उनकी समस्याएं सुनीं। फिलहाल अवार्ड जारी नहीं हुआ है इस मामले में घटिया एसडीएम राजाराम करजरे ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अवार्ड जारी नहीं हुआ है और पूरी प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि भूमि अर्जन अधिनियम के तहत मुआवजे की गणना की जा रही है, जो किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए तय की जाएगी। किसान प्रतिनिधि दिनेश पटेल ने बताया कि उज्जैन-जावरा रोड से प्रभावित गांवों के किसान एकत्र होकर एमपीआरडीसी कार्यालय पहुंचे थे। किसानों का आरोप है कि उन्हें मुआवजे को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। साथ ही, कई क्षेत्रों में पुराने गाइडलाइन के आधार पर अवार्ड तैयार किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है, जिससे वे संतुष्ट नहीं हैं। आश्वासन था कि बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा मिलेगा किसानों का कहना है कि उन्हें पहले आश्वासन दिया था कि बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा मिलेगा, लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा होता नजर नहीं आ रहा। खासकर नागदा, खाचरोद और उन्हेल क्षेत्र के किसानों ने इसे बड़ा मुद्दा बताया है। किसानों ने मांग की है कि हर गांव के अनुसार स्पष्ट रूप से बताया जाए कि किस क्षेत्र को कितना मुआवजा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी प्रकार का विवाद नहीं चाहते, लेकिन उन्हें सम्मानजनक और उचित मुआवजा मिलना चाहिए। गौरतलब है कि किसान कुछ समय पहले मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं, जहां उन्हें आश्वासन दिया था।
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