कार-बाइक छोड़ घोड़ी पर सवार होकर डॉक्टर के पास पहुंचा मरीज, देखें वीडियो

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Khandwa News: अल्फेज मंसूरी ने लोकल 18 को बताया कि यह उनके लिए कोई नई बात नहीं है. वह अक्सर घोड़े से ही आना-जाना करते हैं. उनके पेट में गैस और एसिडिटी की दिक्कत होने पर वह डॉ अनिल पटेल के पास इलाज कराने पहुंचे थे.

खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा में इन दिनों एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को चौंका दिया. शहर की सड़कों पर जहां आमतौर पर लोग बाइक, कार या ऑटो से आते-जाते नजर आते हैं, वहीं एक युवक घोड़े पर सवार होकर डॉक्टर के पास पहुंच गया. यह नजारा जिसने भी देखा, कुछ देर के लिए ठहर गया और देखते ही देखते यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया. दरअसल खंडवा के घासपुर इलाके में रहने वाले अल्फेज मंसूरी अपने अनोखे अंदाज के चलते सुर्खियों में आ गए. बताया जा रहा है कि उन्हें पेट में गैस और एसिडिटी की समस्या हो रही थी. ऐसे में उन्होंने डॉक्टर के पास जाने का सोचा लेकिन गाड़ी निकालने के बजाय उन्होंने घोड़ी को ही तैयार कर लिया. उनका कहना है कि जब घोड़ी खड़ी ही है, तो क्यों न उसी से चला जाए. इससे घोड़ी का घूमना भी हो जाएगा और उनका काम भी हो जाएगा. जैसे ही अल्फेज घोड़ी पर सवार होकर शहर की सड़कों से निकले, लोग उन्हें देखते ही रह गए. कई लोग हैरान थे कि आज के दौर में कोई इस तरह घोड़े पर बैठकर डॉक्टर के पास जा सकता है. कुछ लोगों ने तो मोबाइल निकालकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया और यह नजारा सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आ गया. सड़क पर कुछ देर के लिए लोगों की भीड़ भी जमा हो गई.

लोकल 18 से बातचीत में अल्फेज मंसूरी ने बताया कि यह उनके लिए कोई नई बात नहीं है. वह अक्सर घोड़े से ही आना-जाना करते हैं. उन्होंने बताया कि पेट में गैस और एसिडिटी की शिकायत होने पर वह डॉक्टर अनिल पटेल के पास इलाज कराने पहुंचे थे. उन्होंने हंसते हुए कहा कि पेट्रोल भी महंगा हो गया है और घोड़े को भी घुमाना जरूरी है. तो सोचा एक ही बार में दोनों काम हो जाएं. अल्फेज ने बताया कि उनके पास कुल 4 घोड़े-घोड़ियां हैं, जिनके नाम भी बड़े दिलचस्प हैं. बादशाह, रानू, रोशनी और काजल. इनमें बादशाह सबसे खास है, जो करीब पांच साल से उनके पास है. वहीं रानू करीब 10 साल, रोशनी 9 साल और काजल 7 साल से परिवार के साथ हैं.

घोड़ों को बताया परिवार का सदस्य
उन्होंने बताया कि ये सभी घोड़े उनके लिए सिर्फ जानवर नहीं बल्कि परिवार के सदस्य जैसे हैं. इनकी देखभाल भी उसी तरह की जाती है. उनका परिवार पीढ़ियों से घोड़ों का कारोबार करता आ रहा है. शकील मंसूरी, अशफाक मंसूरी, अशरफ मंसूरी और जुनेद मंसूरी मिलकर इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं. यह उनका पुश्तैनी व्यवसाय है और अब उनकी तीसरी पीढ़ी भी इसी काम में जुड़ी हुई है. शादी-ब्याह के सीजन में इनके घोड़े काफी डिमांड में रहते हैं लेकिन फिलहाल सीजन नहीं होने के कारण घोड़ों को खाली नहीं छोड़ते बल्कि उन्हें नियमित रूप से घुमाते रहते हैं. अल्फेज का कहना है कि जब भी वह घोड़े पर शहर में निकलते हैं, तो लोग उन्हें देखकर हैरान हो जाते हैं. कई लोग फोटो और वीडियो बनाने लगते हैं लेकिन उनके लिए यह बिल्कुल सामान्य बात है. उन्होंने कहा कि हम बचपन से ही घोड़ों के बीच पले-बढ़े हैं, इसलिए घोड़े पर बैठना हमारे लिए उतना ही आम है, जितना किसी के लिए बाइक चलाना.

18 साल से इलाज को आ रहा परिवार
वहीं जिस डॉक्टर के पास वह इलाज कराने पहुंचे थे, उन्होंने भी इस पूरे मामले को सामान्य बताया. डॉक्टर अनिल पटेल ने कहा कि यह परिवार पिछले करीब 18 सालों से उनके पास इलाज के लिए आता रहा है. जब अल्फेज छोटे थे, तब से वह उनके पास आ रहे हैं और कई बार घोड़े से ही क्लीनिक पहुंचे हैं. डॉक्टर ने बताया कि शुरुआत में जब उन्होंने पहली बार इन्हें घोड़े से आते देखा था, तो उन्हें भी थोड़ा अचरज हुआ था लेकिन अब यह उनके लिए भी आम बात हो गई है. उन्होंने यह भी कहा कि इस परिवार के पास अच्छी नस्ल के घोड़े हैं और वे उनकी काफी अच्छी देखभाल करते हैं.

जिंदा है परंपरा और शौक
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि आज के आधुनिक दौर में भी कुछ लोग अपनी परंपरा और शौक को जिंदा रखे हुए हैं. जहां एक तरफ लोग महंगी गाड़ियों के पीछे भाग रहे हैं, वहीं खंडवा का यह परिवार आज भी घोड़ों के साथ अपना जुड़ाव बनाए हुए है. ऐसे में यह नजारा भले ही लोगों के लिए अजब-गजब हो लेकिन शकील मंसूरी और उनके परिवार के लिए यह उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. उनके लिए घोड़े सिर्फ सवारी का साधन नहीं बल्कि परिवार के अहम सदस्य हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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