भोजशाला विवाद: SC पहुंचा मुस्लिम पक्ष! आदेश को दी चुनौती, 1 अप्रैल को सुनवाई

भोजशाला विवाद: SC पहुंचा मुस्लिम पक्ष! आदेश को दी चुनौती, 1 अप्रैल को सुनवाई


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भोजशाला विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 16 मार्च 2026 के आदेश को चुनौती दी है जिसमें जजों ने विवादित स्थल का स्वयं निरीक्षण करने का फैसला लिया था. सुप्रीम कोर्ट 1 अप्रैल को याचिका पर सुनवाई करेगा. मुस्लिम पक्ष का कहना है कि एएसआई रिपोर्ट पर जवाब देने का पर्याप्त समय नहीं मिला. हाईकोर्ट 2 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू करने वाला था.

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धार भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में शरण ली है.

भोपाल. मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद में मुस्लिम पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 16 मार्च 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें कोर्ट के दो जजों ने विवादित स्थल का स्वयं निरीक्षण करने का फैसला लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस विशेष अनुमति याचिका पर 1 अप्रैल 2026 को सुनवाई तय कर दी है. हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू करने के साथ ही जजों के स्थल निरीक्षण का कार्यक्रम बनाया था ताकि भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर चल रहे विवाद में स्पष्टता आ सके. मुस्लिम पक्ष का कहना है कि एएसआई की रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला है और जजों का प्रत्यक्ष निरीक्षण अनावश्यक है. 1 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट क्या तय करेगा सुप्रीम कोर्ट 1 अप्रैल को याचिका पर सुनवाई करेगा. यदि रोक लगाई गई तो हाईकोर्ट की प्रक्रिया प्रभावित होगी. अन्यथा 2 अप्रैल से हाईकोर्ट में अंतिम बहस शुरू हो जाएगी.

यह याचिका भोजशाला विवाद को नया मोड़ दे रही है. 11वीं शताब्दी का यह एएसआई संरक्षित स्मारक हिंदू पक्ष के लिए मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है. हाईकोर्ट में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर चल रही सुनवाई के दौरान 16 मार्च को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने जजों के स्थल भ्रमण का ऐलान किया. मुस्लिम पक्ष ने तर्क दिया कि एएसआई रिपोर्ट 2024 में जमा हो चुकी है. उसे खोलने और आपत्तियां दाखिल करने का समय कम है. सुप्रीम कोर्ट की 1 अप्रैल की सुनवाई अब तय करेगी कि हाईकोर्ट का यह आदेश लागू होगा या नहीं. यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि सांप्रदायिक सद्भाव और ऐतिहासिक सत्य की खोज से जुड़ा है.

रिपोर्ट पर आपत्तियां दाखिल करने का समय नहीं मिला?
मुस्लिम पक्ष की याचिका में मुख्य दलीलें मुस्लिम पक्ष ने याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट का 16 मार्च का आदेश एएसआई रिपोर्ट पर पर्याप्त सुनवाई के बिना लिया गया. रिपोर्ट पर आपत्तियां दाखिल करने का समय नहीं मिला. जजों का प्रत्यक्ष निरीक्षण पूर्वाग्रह पैदा कर सकता है. याचिका में मांग की गई है कि हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए. हाईकोर्ट का 16 मार्च का आदेश इंदौर बेंच ने 16 मार्च को याचिका की सुनवाई के दौरान तय किया कि दो जज 2 अप्रैल की सुनवाई से पहले स्वयं भोजशाला-कमल मौला परिसर का निरीक्षण करेंगे. इसका मकसद स्थल की संरचना. वास्तुकला और ऐतिहासिक तथ्यों को समझना था. हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू करने का भी फैसला किया.

भोजशाला 11वीं शताब्दी का स्मारक
भोजशाला विवाद का पूरा बैकग्राउंड भोजशाला 11वीं शताब्दी का स्मारक है. हिंदू पक्ष इसे सरस्वती मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद. 2024 में हाईकोर्ट ने एएसआई को वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया. एएसआई ने 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट जमा की जिसमें प्राचीन मंदिर के अवशेष मिलने का दावा किया गया. जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट खोलने और आपत्तियां मांगने का निर्देश दिया.

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Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें



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