भोपाल. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मध्य प्रदेश में अपनी जमीनी ताकत को और मजबूत करने के लिए एक व्यापक गांव-केंद्रित अभियान की तैयारी कर रही है. 7 से 12 अप्रैल तक राज्य के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों के हर बड़े गांव-बस्तियों में मंत्री, विधायक और सांसद पहुंचेंगे. पार्टी ने हर विधानसभा क्षेत्र के 50 बड़े गांवों में विशेष सम्मेलन आयोजित करने का फैसला लिया है, जिसमें पुराने कार्यकर्ताओं के घर जाकर बड़े नेता-मंत्री उनका सम्मान करेंगे और उनसे फीडबैक लेंगे. भाजपा सूत्रों के अनुसार, यह कार्यक्रम ‘गांव संवाद अभियान’ के रूप में जाना जाएगा. इसका मकसद सिर्फ चुनावी तैयारियां नहीं, बल्कि विकास योजनाओं की ग्रामीण स्तर पर समीक्षा, जनसमस्याओं का समाधान और पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना है.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और संगठन महामंत्री ने सभी जिलाध्यक्षों और मोर्चा प्रमुखों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं. हर विधानसभा क्षेत्र में 50 प्रमुख गांवों की सूची तैयार कर ली गई है. इन गांवों में कम से कम एक बड़ा सम्मेलन होगा, जिसमें स्थानीय सांसद, विधायक, मंत्री या केंद्रीय पर्यवेक्षक शामिल होंगे. 7 अप्रैल से शुरू होकर 12 अप्रैल तक यह अभियान चलेगा. सुबह से शाम तक कार्यक्रम निर्धारित हैं. सम्मेलनों में केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं जैसे पीएम किसान सम्मान निधि, जनधन योजना, आयुष्मान भारत, पक्का मकान, सड़क और बिजली कनेक्शन, महिला स्व-सहायता समूह और आदिवासी कल्याण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी. साथ ही, आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों की रणनीति पर भी चर्चा होगी.
पुराने और समर्पित भाजपा कार्यकर्ताओं के घर व्यक्तिगत रूप से जाएंगे नेता
एक खास पहल यह है कि बड़े नेता पुराने और समर्पित भाजपा कार्यकर्ताओं के घर व्यक्तिगत रूप से जाएंगे. पार्टी के अनुसार, “पुराने वर्कर्स ही हमारी रीढ़ हैं. उनका अनुभव और समर्पण हमें नई ऊर्जा देता है.” इन घरेलू मुलाकातों में नेता कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे, उनके योगदान को याद करेंगे और भविष्य की भूमिका पर चर्चा करेंगे. इससे कार्यकर्ताओं में नई जोश भरेगा और पार्टी की आंतरिक एकता मजबूत होगी. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, सांसद और विधायक इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होंगे. कुछ क्षेत्रों में केंद्रीय मंत्री भी कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे. हर सम्मेलन में कम से कम एक बड़े नेता की मौजूदगी सुनिश्चित की गई है.
गांवों में अपनी पैठ बनाने की रणनीति
भाजपा का मानना है कि शहर-केंद्रित राजनीति से आगे बढ़कर गांवों तक पहुंचना जरूरी है. मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ असंतोष के स्वर उठते रहे हैं. इस अभियान से उन स्वरों को संबोधित करने और विकास कार्यों की सही जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा. प्रदेश स्तर पर एक कोर कमिटी गठित की गई है, जो पूरे अभियान की मॉनिटरिंग करेगी. हर जिले में अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं. सम्मेलनों के लिए मंच, ध्वनि व्यवस्था, स्वागत समिति और फीडबैक फॉर्म तैयार किए जा रहे हैं.
कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर फोकस
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय मुद्दों जैसे सिंचाई, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर फोकस रहेगा. गांववासियों से सीधे संवाद के जरिए सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा. साथ ही, विपक्षी दलों द्वारा फैलाई जा रही भ्रांतियों का भी मुकाबला किया जाएगा. भाजपा नेता मानते हैं कि 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली भारी जीत के बाद भी निरंतर जनसंपर्क जरूरी है. यह अभियान पार्टी को 2028 के अगले चुनाव के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगा. पुराने कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपने और युवा पीढ़ी को जोड़ने का भी प्रयास होगा.
जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ बनाने में लगी भाजपा
अभियान की सफलता के लिए सभी मोर्चों-महिला, युवा, किसान, आदिवासी और अल्पसंख्यक मोर्चा को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं. उम्मीद है कि इन छह दिनों में हजारों गांवों में भाजपा की पहुंच और गहरी होगी. यह कार्यक्रम न केवल संगठनात्मक मजबूती का प्रतीक होगा, बल्कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र को ग्रामीण भारत में और मजबूती से स्थापित करेगा. भाजपा का यह कदम दिखाता है कि पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ बनाए रखने और विस्तार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है.