जहां राक्षसों का वध और पिता दशरथ का श्राद्ध हुआ, वही है राम झरोका मंदिर की खासियत, जानें अ

जहां राक्षसों का वध और पिता दशरथ का श्राद्ध हुआ, वही है राम झरोका मंदिर की खासियत, जानें अ


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Burhnapur News: लोकल 18 की टीम को मंदिर के पुजारी नर्मदानंद गिरी जी महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मंदिर भगवान श्री राम का प्राचीन मंदिर हैं. इस मंदिर की कहानी भगवान श्री राम के वनवास से जुड़ी हुई है. भगवान श्री राम और माता सीता खुद यहां पर आ चुके हैं और उन्होंने अपने पिता दशरथ राजा का श्राद्ध ताप्ती नदी के तट पर किया था.

Ancient Ram Jharoka Temple: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में आज भी कई प्राचीन मंदिर मौजूद है जिनकी अपनी-अपनी कहानी है. आज हम आपको एक मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के भगवान श्री राम के वनवास की कहानी से जुड़े एक ऐसे मंदिर की कहानी से रूबरू करा रहे है कि भगवान श्री राम और सीता माता स्वयं इस मंदिर पर आए थे और उन्होंने अपने पिता दशरथ राजा का श्राद्ध किया था तो वही यहां पर कई राक्षसों का उनके द्वारा वध किया गया था मंदिर के पुजारी नर्मदानंद गिरी जी महाराज ने बताया कि यह मंदिर काफी प्राचीन मंदिर है यहां पर भगवान श्री राम एक रात रूके थे. इसलिए इस मंदिर का नाम राम झरो का मंदिर रखा गया है. इस मंदिर पर आज भी भक्त दूर-दूर से दर्शन पूजन करने के लिए आते हैं.

महाराज ने दी जानकारी 
लोकल 18 की टीम को मंदिर के पुजारी नर्मदानंद गिरी जी महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मंदिर भगवान श्री राम का प्राचीन मंदिर हैं. इस मंदिर की कहानी भगवान श्री राम के वनवास से जुड़ी हुई है भगवान श्री राम और माता सीता स्वयं यहां पर आ चुके हैं और उन्होंने अपने पिता दशरथ राजा का श्राद्ध ताप्ती नदी के तट पर किया था और उन्होंने एक रात यहीं पर विश्राम किया है. इसलिए इस मंदिर का नाम राम झरोखा मंदिर रखा गया है. इस मंदिर पर दूर-दूर से भक्त आज भी दर्शन पूजन करने के लिए आते हैं. रामनवमी के अवसर पर भजन संध्या से लेकर तो भंडारे का आयोजन भी होता है. यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना बताया जाता है.

बुरहानपुर से पंचवटी की यात्रा की थी पूरी 
महाराज ने यह भी बताया कि जब भगवान श्री राम वनवास के दौरान बुरहानपुर आए तो उन्होंने यहां पर एक रात का विश्राम करने के बाद वह ताप्ती नदी के रास्ते से होते हुए पंचवटी के लिए निकले और वह महाराष्ट्र के पंचवटी में पहुंचे वनवास की कहानी से इस मंदिर की कहानी जुड़ी होने के कारण आज भी यहां पर देश-विदेश के पर्यटक आते हैं और इसके इतिहास से रूबरू होते हैं. आज भी माना जाता है कि जो भी लोग अपने पिता या माता का श्राद्ध ताप्ती नदी के तट पर करते हैं तो उनको शांति मिलती है.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें



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