न्याय की लड़ाई: वकील के लिए पैसे नहीं थे, ऐसे 480 लोगों को केस लड़ बरी कराया, 800 लोगों को जमानत भी दिलाई – Bhopal News

न्याय की लड़ाई:  वकील के लिए पैसे नहीं थे, ऐसे 480 लोगों को केस लड़ बरी कराया, 800 लोगों को जमानत भी दिलाई – Bhopal News




पिछले तीन साल से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए सालों से जेल में बंद बेकसूर लोगों को फ्री में मदद दिलाई जा रही है। लीगल एड डिफेंस काउंसिल के वकीलों ने 2023 से अब तक 2600 से ज्यादा मामलों में आरोपियों की ओर से पैरवी की है। इनमें से 480 से ज्यादा ऐसे बेकसूर लोग थे, जिनके पास वकील करने तक के पैसे नहीं थे। वे सालों से जेल में बंद थे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से मिली मदद से उन्हें सभी आरोपों से मुक्त किया गया। इसके अलावा अब तक 970 आरोपियों की ओर से कोर्ट में विधिक सेवा की ओर से जमानत लगाई गई। इनमें से करीब 800 लोगों को जमानत दिलाई गई। दरअसल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए गरीब लोग आसानी से कानूनी सहायता ले सकते हैं। भोपाल के कई चर्चित मामलों में भी कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से वकील कराकर दिए हैं। ये लोग ले सकते हैं मदद…
अजा-अजजा के लोग। ह्यूमन ट्रैफिकिंग के पीड़ित। कोई भी महिला-बच्चा। विकलांग। आपदा पीड़ित। जेल के कैदी। सालाना हजार से कम आय वाले। (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में लीगल एड डिफेंस काउंसिल की एक चीफ, 4 डिप्टी एलएडीसी, 8 जूनियर एलएडीसी हैं।) हफ्ते में दो दिन जेल में बंद कैदियों से होती है पूछताछ:
चीफ एलएडीसी हर सोमवार और शुक्रवार को जेल का दौरा करती हैं। इस दौरान कैदियों से विधिक सेवा लेने के संबंध में पूछताछ की जाती है। यदि कोई भी कैदी वकील की मांग करता है, तो उसे वकील मुहैया कराया जाता है। कई मामलों में आरोपियों के पास वकील नहीं होते। उनके कोर्ट पहुंचने पर कोर्ट के आदेश से विधिक सेवा के जरिए वकील कराया जाता है। हत्या के आरोप से बरी कराया
झुग्गी में आग लगाकर हत्या करने के आरोप में 436 दिन जेल में रहने के बाद कोर्ट ने आरोपी आकाश को बरी कर दिया। कोर्ट ने पुलिस को 13 बिंदुओं पर गलत बताया था। आकाश की ओर से लीगल एड डिफेंस से एडवोकेट रीना वर्मा, श्रेयश सक्सेना ने पैरवी की थी। कोर्ट में बताया गया कि विवेचना अधिकारी मर्ग सूचना मिलने से पहले ही मौके पर कैसे पहुंचे थे। इसका कोई जवाब पुलिस पेश नहीं कर पाई। पुलिस ने आकाश के पास से पेट्रोल या मिट्टी का तेल जब्त नहीं किया था। बल्कि एक डंडा जब्त किया था। मृतक की मौत में डंडे का कोई इस्तेमाल नहीं किया गया था। झूठे दुष्कर्म के आरोप से कराया बरी
घटना 10 नवंबर 2022 की कोलार थाना क्षेत्र की थी। नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के झूठे आरोप में हरिनारायण को 3 साल तक जेल में रहना पड़ा। इस दौरान लीगल एड डिफेंस से मुकेश गौर ने हरिनारायण के केस में पैरवी की। कोर्ट में सामने आया कि पीड़िता की मां, आरोपी के बीच विवाद हुआ था। इसमें पीड़िता की मां ने हरिनारायण पर हमला किया था। इससे उसके सिर में चोट आई थी। इसी से बचने के लिए पीड़िता की मां ने पहले थाने पहुंचकर हरिनारायण के खिलाफ अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा दिया था। पुलिस ने इस मामले में हरिनारायण की मेडिकल रिपोर्ट, उसके द्वारा पीड़िता की मां के खिलाफ दर्ज कराए गए केस को कोर्ट में पेश नहीं किया था। केस, मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट के सामने आने के बाद हरिनारायण को बरी किया गया।



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