Last Updated:
Sagar News: कृषि विभाग को सैटेलाइट के माध्यम से यह सूचना मिलेगी कि कहां पर पराली में आग लगाई है. इसके बाद राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर जाएंगे और तसदीक करेंगे कि आग कैसी लगी.
सागर. मौसम में उतार-चढ़ाव होने की वजह से किसान असमंजस में आ जाते हैं और ऐसे में वह अपने खेतों में खड़ी फसल को कतर से या सीधा हार्वेस्टर से निकलवा देते हैं ताकि उन्होंने पिछले चार महीना में जो मेहनत की है और जो उपज निकलनी है, वह कम से कम सुरक्षित तरीके से घर पहुंच जाए. कई किसान मजदूर, थ्रेसिंग और वर्तमान के अन्य झंझटों से बचने के लिए हार्वेस्टर चलवाते हैं. इसकी वजह से उपज तो घर पर आ जाती है लेकिन खेतों में पराली रह जाती है और फिर किसान भाई इस पराली को खत्म करने के लिए उसमें आग लगा देते हैं. ऐसा होने से कभी-कभी दूसरे खेतों में आग पहुंचने से नुकसान हो जाता है या बड़ी घटनाएं हो जाती हैं. वहीं खेतों में आगजनी से मिट्टी के अंदर रहने वाले जीवाणु मर जाते हैं और मिट्टी कठोर होने लगती है. उसके पोषक तत्व कम हो जाते हैं, जिसकी वजह से मिट्टी धीरे-धीरे बंजर होने लगती है. इन तमाम तरह की चिंताओं को देखते हुए प्रशासन द्वारा पिछले कुछ सालों से पराली में आग लगाने पर सख्ती बढ़ती जा रही है.
मध्य प्रदेश के सागर में कृषि विभाग को सैटेलाइट के जरिए यह सूचना मिलेगी कि कहां पर पराली में आगजनी की घटना हुई है. इसके बाद राजस्व विभाग से संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचेंगे और वेरीफाई करेंगे कि आग कैसी लगी. अगर यह पाया जाता है कि किसान ने जान-बूझकर ऐसा किया है, तो उनके खिलाफ सबसे पहले पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी और जिन किसानों पर रिपोर्ट दर्ज हो जाएगी, उन्हें किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाली सालाना 12000 रुपये की राशि को रोक दिया जाएगा. इसके साथ ही जो सरकारी नीति के तहत गेहूं, चना, सोयाबीन, मसूर सहित अन्य अनाज का उपार्जन किया जाता है, इससे भी वे किसान ब्लैकलिस्ट हो जाएंगे.
जमीन के अनुसार लगाया जाता है जुर्माना
सागर कृषि विभाग के उप-संचालक राजेश त्रिपाठी लोकल 18 को बताते हैं कि आगजनी से पर्यावरण क्षति को देखते हुए 2500 रुपये, 5000 रुपये और 15000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है. यह जुर्माना किसान की कम-ज्यादा जमीन के अनुसार लगाया जाता है. वसूली होने के बाद भी जो किसान बार-बार इस तरह की घटनाएं करेंगे, उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया जाएगा. इसके साथ ही उन्हें शासन से मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित कर दिया जाएगा. ऐसे में किसानों से अपील है कि खेतों में पराली न जलाएं.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.