टेस्ट के 10 अंपायर…जिन्होंने सबसे ज्यादा मैचों में की अंपायरिंग

टेस्ट के 10 अंपायर…जिन्होंने सबसे ज्यादा मैचों में की अंपायरिंग


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टेस्ट के 10 अंपायर…जिन्होंने सबसे ज्यादा मैचों में की अंपायरिंग

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10 umpires who Most matches as an umpiring in Test: क्रिकेट के मैदान पर फैसले की घड़ी हो या दबाव के बीच सटीक निर्णय, इन ‘मैदानी जजों’ ने खेल की परिभाषा बदली है. अलीम डार के 145 टेस्ट मैचों के अविश्वसनीय शिखर से लेकर स्टीव बकनर की ‘स्लो डेथ’ उंगली तक, यह कहानी है उन 10 महान अंपायरों की जिन्होंने तकनीक और चुनौतियों के बीच जेंटलमैन गेम की गरिमा बचाए रखी.जानते हैं कौन हैं टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा मैचों में न्याय करने वाले पर्दे के पीछे के असली नायक.

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नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर जब कोई बल्लेबाज शतक लगाता है या कोई गेंदबाज पांच विकेट झटकता है, तो हेडलाइंस वही बटोरते हैं. लेकिन व्हाइट जर्सी के इस खेल में एक किरदार ऐसा भी होता है, जो घंटों चिलचिलाती धूप में खड़ा रहता है, जिसकी एक उंगली का उठना किसी का करियर बना सकता है और एक गलत फैसला उसे विलेन. जब बात टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा मौजूदगी की आती है, तो पाकिस्तान के अलीम डार का नाम सबसे ऊपर आता है. 2003 से 2023 तक के अपने 20 साल के करियर में डार ने 145 टेस्ट मैचों में अंपायरिंग की है. डार की खासियत उनका ‘डिसीजन रिव्यू सिस्टम’ के दौर में भी बेहद सटीक फैसले देना था.

वेस्टइंडीज के स्टीव बकनर (128 मैच) और दक्षिण अफ्रीका के रूडी कर्टजन (108 मैच) उस दौर के अंपायर थे जब तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी. बकनर को उनकी धीमी उंगली उठाने की शैली (Slow Death) के लिए जाना जाता था. वहीं, कर्टजन अपने ‘स्लो मोशन’ में उंगली उठाने के अंदाज के लिए मशहूर थे. इन दोनों ने मिलकर 200 से ज्यादा टेस्ट मैचों में न्याय किया और क्रिकेट के कई ऐतिहासिक पलों के गवाह बने.

टकर, केटलबरो और धर्मसेना आधुनिक युग के सितारे
वर्तमान दौर की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया के रॉड टकर 98 मैचों के साथ अलीम डार के रिकॉर्ड के करीब पहुंच रहे हैं. उनके साथ इंग्लैंड के रिचर्ड केटलबरो (94) और श्रीलंका के कुमार धर्मसेना (93) की तिकड़ी ने मॉडर्न क्रिकेट में अंपायरिंग के स्तर को बहुत ऊंचा उठाया है. केटलबरो को उनकी गजब की एकाग्रता के लिए जाना जाता है, जबकि धर्मसेना (जो खुद एक विश्व कप विजेता खिलाड़ी रहे हैं) ने खिलाड़ी से अंपायर बनने के सफर को एक नई पहचान दी है.

जब मैदान पर डेविड शेफर्ड और बिली बोडेन ने किया एंटरटेन
क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में डेविड शेफर्ड (92 मैच) के लिए एक खास जगह है. जब भी स्कोर बोर्ड पर 111 (नेल्सन) आता था, शेफर्ड का एक पैर पर कूदना फैंस को रोमांचित कर देता था.वहीं न्यूजीलैंड के बिली बोडेन (84 मैच) अपनी टेढ़ी उंगली (Crooked Finger) से आउट देने के अंदाज के लिए जाने जाते थे. इन अंपायरों ने दिखाया कि अंपायरिंग सिर्फ नियम लागू करना नहीं, बल्कि खेल में अपनी शख्सियत से रंग भरना भी है.

अंपायरिंग की चुनौतियां और बदलता स्वरूप
इस लिस्ट को देखने पर पता चलता है कि एक टेस्ट अंपायर के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानसिक थकान है. 5 दिनों तक हर गेंद पर शत-प्रतिशत ध्यान केंद्रित करना किसी तपस्या से कम नहीं है. आज के अंपायरों के हर फैसले को तकनीक की कसौटी पर परखा जाता है.घंटों मैदान पर खड़े रहने के लिए शारीरिक फिटनेस भी जरूरी है. आईसीसी के एलीट पैनल के आने के बाद अंपायरों की निष्पक्षता पर भरोसा और बढ़ा है.

अलीम डार से लेकर मारेस इरास्मस तक, इन 10 अंपायरों ने कुल मिलाकर सैकड़ों ऐतिहासिक शतकों और जादुई स्पेल्स को अपनी आंखों के सामने घटते देखा है. भले ही इनके नाम पर रिकॉर्ड बुक में रन या विकेट दर्ज न हों, लेकिन इन ‘मैदानी जजों’ के बिना क्रिकेट का इतिहास अधूरा है. इन दिग्गजों ने साबित किया है कि एक महान अंपायर वह नहीं है जो सिर्फ सही फैसले दे, बल्कि वह है जो खेल की गरिमा और अनुशासन को बनाए रखे. आने वाले समय में शायद रॉड टकर या केटलबरो अलीम डार के 145 मैचों के जादुई आंकड़े को पार कर जाएं, लेकिन इन सभी का योगदान टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा.

About the Author

Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें



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