भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई घटना के तीन महीने बाद भी क्षेत्र में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। हादसे के बाद जिस इलाके में पूरा प्रशासनिक अमला डेरा डाले हुए था, वहां अब अफसरों के दौरे कम हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग भी अब हर 15 दिन में कैंप लगाकर निगरानी कर रहा है। क्षेत्र में अब शुद्ध पानी सप्लाय हो रहा है, लेकिन लोग एहतियातन पानी उबालकर पी रहे हैं। दिसंबर में क्षेत्र में दूषित पानी के कारण सैकड़ों लोग बीमार हुए, अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा और कई परिवारों ने अपनों को खो दिया था। इसके बाद यहां पानी सप्लाई रोककर पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की गई थी। तब सामने आया था कि केवल 60 फीसदी हिस्से में नई लाइन डली है। इसके बाद युद्धस्तर पर काम शुरू हुआ और लगभग 25 फीसदी अतिरिक्त क्षेत्र में लाइन बदली गई, लेकिन तीन महीने बाद भी अब तक करीब 90 फीसदी क्षेत्र में ही लाइन बदलने का काम हो सका है। निगम के दावों के बावजूद 10 से 15 फीसदी हिस्से में लाइन डालना बाकी है।
रोज 3-3 मीटर टंकी भरी जा रहीं
फिलहाल पूरे क्षेत्र में टंकी से सामान्य सप्लाई पूरी तरह बहाल नहीं की गई है। बची हुई आबादी तक अब भी नौ टैंकरों से पानी सप्लाय किया जा रहा है। दिसंबर में जब हालात सबसे ज्यादा खराब थे, तब यहां 30 से 40 टैंकर तक लगाए गए थे। संकट के बाद यहां पानी सप्लाई व्यवस्था में बदलाव भी किया गया है। अब टंकियां 3-3 मीटर तक भरी जा रही हैं, जिससे दो हिस्सों में पानी दिया जा रहा है, ताकि लोगों को राहत मिल सके। ब्लीचिंग ज्यादा, लोग बरत रहे सावधानी
इलाके के जिन घरों में टंकी के जरिए पानी दिया जा रहा है, वहां लोग अब भी एहतियातन पानी उबालकर पी रहे हैं। रहवासी कमल ने बताया पानी अब साफ तो आ रहा है, लेकिन कर्मचारियों ने भी उबालकर पीने की सलाह दी है। शुभम का कहना है पानी साफ है, लेकिन उसमें ब्लीचिंग की गंध ज्यादा रहती है, इसलिए उबालकर इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि बोरिंग का पानी नहीं पीने की हिदायत
जांच के दौरान इलाके के कई बोरवेल दूषित पाए गए थे, जिसके बाद कुछ को बंद कराना पड़ा। यहां 114 सरकारी बोरिंग हैं और लोगों को अब भी उनका पानी नहीं पीने की हिदायत दी जा रही है। दूसरी ओर निगम की ओर से रोजाना क्लोरीन टेस्ट किया जा रहा है। जहां नलों से पानी दिया जा रहा है, वहां के सैंपल फिलहाल पास बताए जा रहे हैं।
घनी बसाहट के कारण काम में लग रहा समय
पार्षद कमल वाघेला के मुताबिक इलाके में रोजाना पानी की जांच कराई जा रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र में घनी बसाहट और संकरी गलियों के कारण लाइन डालने के काम में समय लग रहा है। उनके अनुसार करीब 10 फीसदी काम अभी बाकी है।
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