आयुष्मान योजना के तहत प्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में अस्पतालों को लेकर बड़ा बदलाव लागू किया जा रहा है। 398 इंपैनल्ड अस्पतालों में से अब तक सिर्फ 166 अस्पतालों ने ही एनएबीएच (एंट्री लेवल या फुल) की जानकारी दी है, जबकि शेष 232 अस्पतालों की संबद्धता 1 अप्रैल से समाप्त मानी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इन अस्पतालों को नोटिस जारी कर दोबारा आवेदन का मौका दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिन अस्पतालों ने अब तक एनएबीएच सर्टिफिकेट की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है, उनकी जानकारी एकत्र की जा रही है। ऐसे अस्पतालों को एक-दो दिन का समय देकर दोबारा इंपैनलमेंट के लिए आवेदन करने का मौका दिया गया है। इस दौरान यदि जबाव नहीं आता है तो इनकी संबद्धता समाप्त कर दी जाएगी। फुल एनएबीएच से मिलेगा लाभ
जिन अस्पतालों के पास पहले से फुल एनएबीएच सर्टिफिकेट है, उन्हें आवेदन करते ही “डीम्ड इंपैनलमेंट” मिल जाएगा। ऐसे अस्पतालों को अलग से निरीक्षण की जरूरत नहीं होगी। वहीं अन्य अस्पतालों को पहले एंट्री लेवल एनएबीएच लेना होगा और तीन साल के भीतर फुल एनएबीएच स्तर हासिल करना होगा। एंट्री लेवल एनएबीएच अस्पतालों के लिए शुरुआती गुणवत्ता मानकों का प्रमाणन है, जिसमें 50 मानक और 150 ऑब्जेक्टिव एलिमेंट्स शामिल होते हैं। वहीं, फुल एनएबीएच उच्च गुणवत्ता का प्रमाण है, जिसमें 100 से अधिक मानक और 600 ऑब्जेक्टिव एलिमेंट्स का पालन करना होता है। यही नहीं, फुल एनएबीएच अस्पतालों को क्लेम राशि पर 115% भुगतान मिलेगा, जबकि एंट्री लेवल अस्पतालों को 10% अतिरिक्त भुगतान दिया जाएगा। मरीज के फीडबैक से होगी निगरानी
अब मरीज मोबाइल ऐप के जरिए अस्पतालों को फीडबैक दे सकेंगे। इससे अस्पतालों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाएगा और सेवाओं में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
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