PHOTOS: मनोकामना पूरी होने के बाद पहननी पड़ती है ‘निमसाड़ी’, अनोखी परंपरा

PHOTOS: मनोकामना पूरी होने के बाद पहननी पड़ती है ‘निमसाड़ी’, अनोखी परंपरा


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रिपोर्ट- गणेश कुमार बाविस्कर, बुरहानपुर. हमारे देश में अलग-अलग परंपराएं और मान्यताएं हैं. कहीं मनोकामना के लिए लोग मंदिरों में भगवान को चिट्ठी लिखते हैं, तो कहीं पत्थर चढ़ाने का रिवाज है. वहीं मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में एक मंदिर ऐसा है, जहां मन्नत पूरी होने पर भक्त नीम की पत्तियों और टहनियों से बनी ‘निमसाड़ी’ पहनकर मां के दरबार में पहुंचते हैं.

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के ग्राम इच्छापुर में सतपुड़ा पर्वत की गोद में बसे 500 साल पुराने मां इच्छादेवी के दरबार में निमसाड़ी के मन्नत की अनोखी परंपरा निभाई जा रही है. बच्चे हो या बुजुर्ग, महिला हो या पुरुष, हर मन्नत वाला शख्स मातारानी के दरबार में ‘निमसाड़ी’ पहनकर जाता है, तभी मातारानी के दर्शन कर पाता है.

यह सैकड़ों साल पुरानी ऐसी मान्यता है, जिसे लोग आज भी उतनी ही श्रद्धा से निभाते हैं. मन्नत पूरी होने पर भक्त नीम की पत्तियों और टहनियों से बनी ‘निमसाड़ी’ पहनकर मां के दरबार में पहुंचते हैं. साड़ी भी ऐसी कि देखने वाले चौंक उठें और पहनने वाला खुद को देवी की कृपा से भरपूर महसूस करे.

कहते हैं कि नीम की यह चादर केवल संतान सुख ही नहीं देती बल्कि जीवन के हर कष्ट को कड़वे स्वाद की तरह दूर भगा देती है. चैत्र की तेरस से तीन दिवसीय मेला शुरू हुआ. मेले में ढोल, नगाड़ों की ताल पर झूमते भक्त, मिठाइयों की मीठी महक और खिलौनों की खनक, सब मिलकर वातावरण को किसी तिलिस्मी लोक जैसा बना देते हैं.

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मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक, यह परंपरा चैत्र मास की तेरस को निभाई जाती है. लाखों की तादाद में भक्त आते हैं और अपनी मानी हुई मन्नत के पूरी होने के बाद ‘निमसाड़ी’ पहनकर इस मन्नत को चुकाते हैं और मातारानी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं.

यह एक ऐसी परंपरा है, जहां नीम की कड़वाहट भी भक्तों के जीवन में मिठास घोल देती है. इच्छादेवी मंदिर का यह मेला सिर्फ आस्था नहीं बल्कि निमाड़ की संस्कृति, रंग, रौनक और भक्ति का अनोखा संगम है.

भक्तों का मानना है कि मां इच्छादेवी के दरबार में संतान प्राप्ति, व्यापार, रोगों से मुक्ति और अनेक समस्याओं का निदान होता है. मातारानी हर इच्छा और हर मुराद पूरी करती हैं, इसलिए मां का नाम इच्छादेवी पड़ा है.

मंदिर ट्रस्ट के सचिव महेश पाटोंडिकर ने कहा कि स्कंदपुराण में भी निमसाड़ी का वर्णन मिलता है. निमाड़ का अर्थ है नीम की आड़. यहां पर नीम के बहुत सारे पेड़ पाए जाते हैं. मन्नत उतारने वाले शख्स से हम प्रार्थना करते हैं कि वह घर जाकर नीम का एक पौधा जरूर लगाए.

उन्होंने कहा कि मां इच्छादेवी के दरबार में भक्त नौकरी, संतान प्राप्ति, रोगों से मुक्ति, घर में सुख-शांति आदि की मनोकामना लेकर आते हैं और मां उनकी इच्छा जरूर पूरी करती हैं. कामना पूरी होने के बाद भक्त ‘निमसाड़ी’ पहनकर उसे चुकाते हैं और माता की पूजा करते हैं.



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