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Khnadwa Sarpmitra Death: खंडवा में एक सर्पमित्र की दुखद मौत हुई. रात दो बजे सांप पकड़ने गए आशिक मंसूरी को कोबरा ने डस लिया. हिम्मत दिखाते हुए वह सांप काटने के बाद अस्पताल तक गए पर देर हो चुकी थी. जानें कैसे हुई चूक…
सर्पमित्र को कोबरा ने काटा.
Khandwa News: खंडवा में एक ऐसा हादसा हो गया, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया. एक ऐसा शख्स जो दूसरों की जान बचाता था, खुद मौत से नहीं बच सका. करीब एक हजार सांप पकड़ने वाले मशहूर स्नेक कैचर आशिक खान मंसूरी की एक छोटी सी चूक ने उनकी जान ले ली. खंडवा के भोजाखेड़ी गांव के रहने वाले आशिक रात को बरूड़ गांव में एक जहरीले काले कोबरा सांप की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे थे.
हमेशा की तरह बिना किसी शुल्क के उन्होंने सांप को काबू में कर लिया. लेकिन, यहीं एक घातक लापरवाही हो गई. मिट्टी से सने सांप को साफ करने के लिए आशिक ने उस पर पानी डाला. जैसे ही वह उसे संभालने लगे, सांप ने फन उठाकर वार कर दिया. जहर तेजी से शरीर में फैलने लगा. फिर भी आशिक की हिम्मत देखकर सब हैरान रह गए. उन्होंने खुद सांप को डिब्बे में बंद किया और तुरंत खंडवा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंच गए.
एंटी वेनम दिया पर नहीं बचे आशिक
अस्पताल पहुंचते ही अफरातफरी मच गई. डिब्बे में बंद सांप जोर-जोर से फन मार रहा था, पूरा डिब्बा हिल रहा था. डॉक्टरों ने तुरंत आशिक को एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्ट किया और इलाज शुरू कर दिया. लेकिन, तब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका था. रात को ही आशिक अपनी जिंदगी की जंग हार गए.
कई गांवों में मातम
आशिक मंसूरी इलाके में ‘सर्पमित्र’ के नाम से मशहूर थे. गांव-गांव में सांप निकलने पर लोग सबसे पहले उन्हें याद करते थे. बिना लालच के वे लोगों की मदद करते और सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में छोड़ते थे. उनकी मौत से भोजाखेड़ी समेत आसपास के गांवों में मातम पसरा हुआ है.
अस्पताल में अंधविश्वास भी दिखा
मौत के बाद अस्पताल में अंधविश्वास का भी खेल शुरू हो गया. गांववालों ने एक बाबा को फोन किया. फोन पर तंत्र-मंत्र और पीपल के पत्तों से जिंदगी लौटाने की कोशिश की गई, लेकिन विज्ञान के आगे ये सब बेअसर साबित हुआ.
जिस शख्स ने सैकड़ों लोगों को मौत के मुंह से बचाया, वही एक छोटी सी गलती की कीमत अपनी जान देकर चुक गया. यह घटना सांप पकड़ने वालों को सतर्कता बरतने की याद दिलाती है. आशिक जैसे सर्पमित्र समाज के लिए प्रेरणा थे, लेकिन उनकी अनमोल जान एक चूक में चली गई.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें