कांग्रेस नेता प्रदीप राय ने गुरुवार को सिंधी धर्मशाला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने बीना विधायक निर्मला सप्रे के हालिया राजनीतिक आचरण और जबलपुर हाईकोर्ट में चल रहे उनके मामले पर तीखे प्रहार किए। राय ने आरोप लगाया कि विधायक ने विधानसभा जैसे गरिमामय सदन की मर्यादा को कम किया है और क्षेत्र की जनता के साथ ‘विश्वासघात’ किया है। विधानसभा के गेट पर उपस्थिति, पर सदन से दूरी प्रदीप राय ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि निर्मला सप्रे विधानसभा के गेट तक जाकर केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराती हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होतीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विधायक को सदन के अंदर अपनी सीट तक का पता नहीं है। राय के अनुसार, विधायक प्रश्न तो लगाती हैं लेकिन सत्र में अनुपस्थित रहती हैं, जिससे प्रशासनिक अधिकारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। दल-बदल और विकास के दावों पर घेरा प्रेस कॉन्फ्रेंस में राय ने याद दिलाया कि 5 मई 2024 को निर्मला सप्रे ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली थी। उस समय उन्होंने इसे बीना को ‘जिला’ बनाने और ‘विकास’ के लिए दिया गया बलिदान बताया था। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि वर्तमान में बीना की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। उन्होंने क्षेत्र के पूर्व मंत्रियों (ब्रजकिशोर पटेरिया, सुधाकर राव बापट, प्रभु सिंह ठाकुर) के कार्यकाल की तुलना करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान में हर विभाग भ्रष्टाचार में लिप्त है। मई में उपचुनाव की जताई उम्मीद 31 मार्च को जबलपुर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई का जिक्र करते हुए प्रदीप राय ने विश्वास जताया कि न्यायालय जल्द ही जनता की भावनाओं के अनुरूप निर्णय लेगा। उन्होंने दावा किया कि विधायक के स्पष्ट रुख न अपनाने और सदन में सक्रिय न होने के कारण बीना में मई माह तक उपचुनाव की स्थिति बनना लगभग तय है। नगरपालिका और विधायक के बीच खींचतान पर तंज प्रदीप राय ने हाल ही की एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि मस्जिद वार्ड में विधायक काम रुकवाती हैं और नगरपालिका अध्यक्ष काम शुरू करवाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि “आखिर विधायक चाहती क्या हैं?” उन्होंने कहा कि यदि वह अभी भी कागजों में कांग्रेस में हैं, तो उन्हें विधानसभा के अंदर जाकर जनता की आवाज उठानी चाहिए, न कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना चाहिए।
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