शिवपुरी में हनुमानजी की दुर्लभ प्रतिमा, रामायण से खास कनेक्शन, सपना देकर प्रकट हुए थे मनसा

शिवपुरी में हनुमानजी की दुर्लभ प्रतिमा, रामायण से खास कनेक्शन, सपना देकर प्रकट हुए थे मनसा


Shivpuri News: शिवपुरी से ग्वालियर बाईपास की ओर बढ़ते समय एक ऐसा दरबार आता है, जहां पहुंचकर मन अपने आप शांत हो जाता है. यह स्थान मनसा पूरण हनुमान मंदिर है, जो अपने चमत्कार, आस्था और अनोखी मान्यता के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहां विराजमान हनुमानजी की प्रतिमा सामान्य नहीं है. भक्त बताते हैं कि यह दरबार स्वयंभू है, किसी ने स्थापना नहीं कराई, बल्कि प्रभु ने स्वयं सपना देकर अपने दर्शन कराए.

दरबार की सेवा कर रहे अरुण शर्मा बताते हैं कि उनके परिवार की 4 पीढ़ियां इस स्थान की सेवा में लगी हुई हैं. उनके दादाजी के पिताजी को एक रात स्वप्न आया, जिसमें हनुमानजी ने संकेत दिया कि वे एक चिरोल के पेड़ के नीचे विराजमान हैं. उस समय यह पूरा इलाका घने जंगल से घिरा था. पहले तो बात समझ में नहीं आई, लेकिन जब लगातार दो-तीन बार एक जैसा सपना आया, तो परिवार के लोग उस स्थान की खोज में जंगल की ओर निकले.

जब बताए गए स्थान पर पहुंचे, तो सच में एक चिरोल का बड़ा पेड़ था. पेड़ की जड़ों के पास कुछ आकृति दिखाई दी. आसपास की झाड़ियों और मिट्टी को हटाया गया तो वहां हनुमानजी का विग्रह प्रकट हुआ. उसी दिन से यह स्थान ‘मनसा पूरण दरबार’ के रूप में जाना जाने लगा.

स्वयंभू दरबार की अनोखी पहचान
इस दरबार की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है, यानी किसी ने इसे स्थापित नहीं किया, बल्कि यह धरती से प्रकट हुई है. अरुण शर्मा बताते हैं कि ‘यह प्रभु की लीला है, यहां जो भी सच्चे मन से जुड़ता है, वह सुख में नहीं बल्कि आनंद में जीवन जीता है.’ भक्तों का मानना है कि यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है. कई लोग अपनी मनौती पूरी होने पर यहां आकर सेवा करते हैं, प्रसाद चढ़ाते हैं और जय श्री राम के जयकारे लगाते हैं.

दक्षिण मुखी और आशीर्वाद मुद्रा में हनुमान
आमतौर पर हनुमानजी की मूर्ति में वे दास रूप में, हाथ में पर्वत लिए या बाल रूप में दिखाई देते हैं. लेकिन, इस मंदिर में विग्रह बिल्कुल अलग है. यहां हनुमानजी दक्षिण मुखी हैं और आशीर्वाद देने की मुद्रा में विराजमान हैं. ऐसा स्वरूप बहुत ही दुर्लभ माना जाता है. भक्त बताते हैं कि यह वही क्षण दर्शाता है, जब हनुमानजी ब्राह्मण रूप में भगवान राम से मिले थे.

राम-हनुमान मिलन से जुड़ी मान्यता
दरबार से जुड़े लोग एक खास कथा भी बताते हैं. मान्यता है कि जब भगवान राम और हनुमानजी का पहली बार मिलन हुआ था, तब हनुमानजी ब्राह्मण का रूप धारण करके पहुंचे थे. भगवान राम ने उन्हें ब्राह्मण समझकर उनके चरण छुए थे. उस समय हनुमानजी मुस्कुराकर आशीर्वाद की मुद्रा में खड़े हो गए थे. माना जाता है कि मनसा पूरण दरबार में विराजमान यह विग्रह उसी प्रसंग को दर्शाता है. यही कारण है कि यहां हनुमानजी आशीर्वाद देते हुए दिखाई देते हैं.

4 पीढ़ियों से सेवा जारी 
अरुण शर्मा बताते हैं कि उनके परिवार की 4 पीढ़ियां इस दरबार की सेवा में लगी हैं. पहले उनके दादा, फिर पिता और अब वे स्वयं यहां सेवा कर रहे हैं. उनका कहना है कि “यह सेवा हमें प्रभु ने दी है, हम तो बस झाड़ू लगाते हैं, सफाई करते हैं और आने वाले भक्तों को जय श्री राम कहकर स्वागत करते हैं.” दरबार में हर दिन श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है. खासतौर पर मंगलवार और शनिवार को यहां काफी भीड़ देखने को मिलती है.

मनोकामना पूरी होने पर लौटते हैं भक्त
स्थानीय लोगों का कहना है कि जो भी यहां सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है. कई ऐसे उदाहरण हैं, जब लोगों ने नौकरी, स्वास्थ्य, संतान और घर-परिवार की खुशहाली के लिए यहां मनौती मांगी और पूरी होने पर वापस आकर प्रसाद चढ़ाया. मनसा पूरण हनुमान दरबार सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था का ऐसा केंद्र है, जहां भक्त सुख नहीं बल्कि ‘आनंद’ की अनुभूति लेकर लौटते हैं.



Source link