कमलनाथ सरकार ने ओबीसी वर्ग का आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया था, जिसको लेकर उपजे विवाद को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट 27 अप्रैल से नियमित सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा ट्रांसफर किए गए मामलों पर मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को ये निर्देश दिए हैं। सुनवाई के लिए दोपहर 12:30 बजे का समय तय किया गया है। इन मामलों के साथ 87-13 प्रतिशत की विवाद की भी सुनवाई होगी। अशिता दुबे व 11 अन्य की ओर हाईकोर्ट में प्रदेश की पूर्व कमलनाथ सरकार के द्वारा ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने को चुनौती दी गई है। प्रदेश सरकार ने 8 जुलाई 2019 को ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के संबंध में विधानसभा से बिल पारित करके उसका गजट नोटिफिकेशन 17 जुलाई 2019 को प्रकाशित किया था। आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाए जाने को इन मामलों में असंवैधानिक और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के खिलाफ बताया गया है। हाईकोर्ट के द्वारा की जा रही सुनवाई के खिलाफ ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास बुला लिया था। सुप्रीम कोर्ट के 20 अगस्त 2024 के आदेश पर मप्र हाईकोर्ट ने 2 सितम्बर 2024 को ये सभी 10 मामले ट्रांसफर कर दिए थे। इसके बाद 19 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों को वापस मप्र हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया था। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अशिता दुबे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी, ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अधिवक्ता वरुण ठाकुर, मप्र सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, सुको के वरिष्ठ अधिवक्ता केएम नटराज, अतिरिक्त महाधिवक्ता बीडी सिंह हाजिर हुए।
Source link