‘इकबाल’ पर नहीं इकबाल! क्या भोपाल के मैदान का बदलेगा नाम? खड़ा हुआ नया बखेड़ा

‘इकबाल’ पर नहीं इकबाल! क्या भोपाल के मैदान का बदलेगा नाम? खड़ा हुआ नया बखेड़ा


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Iqbal Maidan: भोपाल के इकबाल मैदान को लेकर इस समय सियासी सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं, जहां कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस ग्राउंड का नाम बदलने की मांग की थी. अब आरिफ मसूद ने इस पर तीखा बयान दिया है. दूसरी तरफ मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को नोटिस देकर कार्रवाई के बारे में पूछा है.

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भोपाल के इकबाल ग्राउंड को लेकर सियासत

Iqbal Maidan Bhopal: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर से नाम बदलने को सियासत शुरू हो गई है, जहां इकबाल मैदान के नाम पर सियासी जंग छिड़ी हुई है. मैदान का नाम प्रसिद्ध उर्दू शायर अल्लामा इकबाल के नाम पर रखा गया है. लेकिन राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है. उनकी तरफ से भोपाल के कलेक्टर, शहरी विकास और पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिवों और नगर निगम कमिश्नर को नोटिस दिया है कि इकबाल मैदान का नाम बदलने के लिए क्या कार्रवाई की गई है?

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को शिकायत मिली है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि नाम बदलने के बारे में कोई कार्रवाई नहीं की गई. जबकि भारत विभाजन से जुड़ी विचारधारा के साथ इकबाल जुड़े थे. इकबाल के नाम पर मैदान का नाम भारतीय समाज के एक वर्ग को आहत करता है. मानव अधिकार आयोग ने शिकायत के आधार पर संबंधित विभागों से जवाब मांगा है.

भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की इस कार्रवाई से इत्तेफाक नहीं रखते हैं. मसूद के मुताबिक इकबाल मैदान का नाम बदलवाने जैसे कामों की जगह मानव अधिकार आयोग समाज में हो रही ज्यादतियों पर कार्रवाई करे.

आरिफ मसूद ने बोले तीखे बोल
आरिफ मसूद ने कहा कि हां वो इकबाल, जिसने सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा. मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना. हिन्दी हैं हम, वतन हैं हिन्दोस्तां हमारा. जिसने इस शेर के साथ आजादी की लड़ाई लड़ी हो. अब उसके नाम पर बने इकबाल मैदान का नाम बदलना कुछ नफरत फैलाने वालों को याद आ रहा है. इनसे पूछो ये कहां का इंसाफ है?

आजादी की लड़ाई इकबाल ने हमारे साथ मिलकर लड़ी: मसूद
आरिफ मसूद ने कहा कि पाकिस्तान और हिंदुस्तान का बंटवारा बाद में हुआ. नफरत वालों की वजह से हुआ. ये चीज गौर करने की है. आजादी की लड़ाई हिंदू और मुसलमान सबने मिलकर लड़ी. उसमें अल्लामा इकबाल भी थे, जब उनकी नीयत में फर्क आया, तो हमारे लोगों ने तय कर दिया कि वो अपना फैसला करें. हम अपना फैसला करें. लेकिन इससे ये नहीं होता कि आज हम इन लोगों को नाम बदलें. उनकी कुर्बानियों को भूल जाएं, जो आजादी के वक्त उन्होंने हमारे साथ दी थी. आजादी के वक्त तो वो हमारे साथ थे. बाद में नजरिया बदल गया.

आरिफ मसूद ने मानव अधिकार आयोग पर कसा तंज
आरिफ मसूद ने कहा कि एक सिरफिरे इंसान को मानव अधिकार आयोग का सदस्य बनाया है. उनका काम यही बचा है. जबकि देश के अंदर लड़कियों के साथ बलात्कार हो रहे हैं. इंसानों को सड़क पर मारा जा रहा है. घर जलाए जा रहे हैं. खेत जलाए जा रहे हैं. मानव अधिकार का काम तो ये भी है ना. हम ऐसी चीजों पर कोई तवज्जो नहीं देते हैं.

इकबाल मैदान भोपाल की विरासत है. हम नहीं चाहते कि पुरानी विरासत का नाम बदला जाए लेकिन सरकार है, जो दिल चाहे करो. नफरत के नाम पर करो. इंसाफ तो देना नहीं है. मानव की मदद करना नहीं है.



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