ना चालान, ना रोक-टोक! एमपी का अनोखा ‘ग्रीन कार्ड’, पुलिस भी नहीं करती रोक-टोक

ना चालान, ना रोक-टोक! एमपी का अनोखा ‘ग्रीन कार्ड’, पुलिस भी नहीं करती रोक-टोक


Green Card For Vehicles: एमपी के खंडवा में एक अनोखी पहल के तहत “ग्रीन कार्ड” बनाया जा रहा है, जो आम वाहन चालकों के लिए काफी काम का साबित हो रहा है. इस कार्ड की खास बात यह है कि इसे दिखाने पर बार-बार कागज चेकिंग की जरूरत नहीं पड़ती और लोगों का समय बच जाता है. यही वजह है कि यह कार्ड अब तेजी से चर्चा में है और सैकड़ों लोग इसका फायदा उठा चुके हैं.

1997 में शुरू हुई पहल, एमपी में पहली बार हुआ ऐसा प्रयोग
इस ग्रीन कार्ड की शुरुआत साल 1997 में जेसीआई खंडवा ग्रुप द्वारा की गई थी. उस समय करीब 1000 लोगों के कार्ड बनाए गए थे. खास बात यह रही कि यह मध्य प्रदेश का पहला ऐसा जिला था, जहां इस तरह का प्रयोग शुरू किया गया था. उस दौर में यह आइडिया लोगों के लिए बिल्कुल नया और अनोखा था.

एक कार्ड में पूरी गाड़ी की जानकारी, कागज रखने की जरूरत खत्म
ग्रीन कार्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें वाहन से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी एक ही जगह पर मिल जाती है. इसमें वाहन नंबर, चेसिस नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर, इंश्योरेंस डिटेल और वाहन मालिक की फोटो तक शामिल रहती है. यानी अलग-अलग कागज साथ रखने की झंझट खत्म और एक कार्ड में पूरा रिकॉर्ड.

एसपी के सिग्नेचर से बढ़ती है विश्वसनीयता
इस कार्ड पर खंडवा एसपी के सिग्नेचर भी होते हैं, जिससे इसकी वैधता और भरोसा बढ़ जाता है. जब कोई वाहन चालक यह कार्ड पुलिस को दिखाता है, तो पुलिस को यह समझ आ जाता है कि उसके सभी दस्तावेज पूरे हैं, इसलिए बार-बार रोकने की जरूरत नहीं पड़ती.

4 जिलों में मान्य, हजारों लोग उठा रहे फायदा
यह ग्रीन कार्ड सिर्फ खंडवा तक सीमित नहीं है, बल्कि बुरहानपुर, इंदौर सहित 4 जिलों में मान्य माना जाता है.अब तक 20 से 25 हजार लोगों के कार्ड बनाए जा चुके हैं और लगातार लोग इससे जुड़ते जा रहे हैं.

कैसे बनता है ग्रीन कार्ड, खास प्रक्रिया
LOCAL 18 से बातचीत में रणवीर चावला ने बताया कि जब यह कार्ड बनाया जाता है, तो वहां ट्रैफिक पुलिस और इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहते हैं. वे सभी दस्तावेजों की जांच करते हैं और उसके बाद ही यह कार्ड तैयार किया जाता है, जिससे इसमें दी गई जानकारी पूरी तरह सही रहती है.

क्यों पड़ी इस कार्ड की जरूरत, क्या थी परेशानी
पहले लोग अपने वाहन के कागज साथ रखते थे, जो कई बार खराब हो जाते थे या खो जाते थे. इसी परेशानी को देखते हुए जेसीआई ने एक लेमिनेटेड ग्रीन कार्ड बनाने की शुरुआत की, ताकि लोगों को आसानी हो और उनका समय भी बचे.

आगे और तेज होगी मुहिम
जेसीआई खंडवा के 50 साल पूरे होने जा रहे हैं, ऐसे में संस्था इस पहल को और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी में है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें. यह “ग्रीन कार्ड” आम लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है.जो कागजों की झंझट कम करता है और सफर को आसान बनाता है.



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