सतना. मध्य प्रदेश के सतना की राजनीति में एक ऐसा नाम उभरा, जिसकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती. एक ऐसा व्यक्ति जिसने कभी खुद को राजनीति में देखने की कल्पना भी नहीं की लेकिन वही शख्स मध्य प्रदेश में प्रतिशत के आधार पर सबसे बड़ी जीत दर्ज कर महापौर की कुर्सी पर बैठे हैं. सतना के मेयर योगेश ताम्रकार का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां व्यापार और समाजसेवा दोनों की गहरी जड़ें थीं. उनके पिता स्वर्गीय शंकर प्रसाद ताम्रकार अपने समय के एक प्रतिष्ठित समाजसेवी और व्यवसायी के रूप में जाने जाते थे. बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहने के कारण उनके भीतर राष्ट्रभक्ति और अनुशासन के संस्कार विकसित हुए. हालांकि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि वह राजनीति में आएंगे. वह एक सफल उद्योगपति के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे और विंध्या सेरेमिक्स समेत कई कंपनियों का संचालन कर रहे थे लेकिन वक्त ने करवट ली और संघ से जुड़ाव के चलते उन्हें संगठन में जिम्मेदारियां मिलने लगीं.
राजनीति में उनका प्रवेश भी किसी योजना का हिस्सा नहीं था. पहले उन्हें संघ की राज्य स्तरीय जिम्मेदारी मिली, फिर भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया. खास बात यह रही कि इन पदों के लिए उन्होंने कभी खुद पहल नहीं की. महापौर पद के लिए भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही. न उन्होंने टिकट मांगा और न ही कोई लॉबिंग की लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन्हें सतना नगर निगम का उम्मीदवार बनाया. यह उनके लिए भी एक बड़ा आश्चर्य था लेकिन उन्होंने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया.
रिकॉर्ड जीत और बना इतिहास
चुनाव परिणामों ने सबको चौंका दिया. योगेश ताम्रकार ने न सिर्फ जीत दर्ज की बल्कि प्रतिशत के आधार पर पूरे मध्य प्रदेश में सबसे बड़ी जीत हासिल की. जहां बड़े शहरों में लाखों वोटरों के बीच जीत का अंतर ज्यादा दिखता है, वहीं सतना जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहर में उनका जीत का प्रतिशत सबसे अधिक रहा. करीब ढाई लाख मतदाताओं वाले इस शहर में उन्होंने 24,916 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो राज्य में एक मिसाल बन गई. इस जीत ने उन्हें प्रदेश स्तर पर एक मजबूत जन-नेता के रूप में स्थापित कर दिया.
संस्कृत में शपथ और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
योगेश ताम्रकार ने महापौर पद की शपथ संस्कृत भाषा में लेकर एक अनोखी मिसाल पेश की. यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना और उनकी पहचान को एक अलग आयाम मिला. इसके साथ ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सम्मानित किया गया. जून 2023 में लंदन स्थित ब्रिटिश संसद के पैलेस ऑफ वेस्टमिंस्टर में सोल ऑफ इंडिया अवॉर्ड से नवाजा गया. हाल ही में उन्हें रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा संस्कृत भूषण सम्मान भी मिला, जो उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है.
शहर के विकास में नई सोच और पहल
महापौर बनने के बाद योगेश ताम्रकार ने शहर के विकास को नई दिशा देने का काम किया. सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए नई बस सेवाएं शुरू की गईं. इसके अलावा खेलों को बढ़ावा देने के लिए कबड्डी और वॉलीबॉल जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया गया. स्वच्छता के क्षेत्र में भी सतना ने बड़ी छलांग लगाई. स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में शहर ने अपनी कैटेगरी में देशभर में 12वां स्थान हासिल किया, जो नगर निगम के प्रयासों का परिणाम है.
जल संरक्षण और पर्यावरण पर भी फोकस
योगेश ताम्रकार के कार्यकाल में जल संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. अब तक 7 तालाबों का निर्माण और उद्घाटन किया जा चुका है जबकि चार अन्य तालाबों का भूमि पूजन हो चुका है. इसके साथ ही शहर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया. जहां 11 हजार पेड़ लगाने का लक्ष्य था, वहां 17 हजार पौधे लगाए गए. पिछले साल यह आंकड़ा और बढ़कर 28 हजार तक पहुंच गया था. साथ ही सोकपिट निर्माण की अनूठी पहल के तहत शहर के सार्वजनिक स्थानों और पार्कों में हजारों गड्ढे बनाए जा रहे हैं, जिससे वर्षा जल का संरक्षण सुनिश्चित हो सके.
शहर की जरूरत सीवर लाइन परियोजना
शहर के सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक सीवर लाइन परियोजना रही है. इस प्रोजेक्ट को लेकर उन्हें लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने इसे शहर की जरूरत बताते हुए काम जारी रखा. उनका मानना है कि किसी भी विकसित शहर के लिए सीवर सिस्टम लाइफलाइन की तरह होता है. उन्होंने 10 साल पुराने इस प्रोजेक्ट को चुनौती के रूप में लिया और अब तक 90-95 प्रतिशत काम पूरा करवा लिया है.
पानी की समस्या का स्थायी समाधान
सतना में लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई थी, जो एकमात्र एनीकट पर निर्भरता के कारण और गंभीर हो जाती थी. इसे ध्यान में रखते हुए एक नए एनीकट का निर्माण शुरू किया गया है, जिसकी लागत करीब 40 करोड़ रुपये है. इस परियोजना के पूरा होने के बाद शहर को दो हिस्सों में बांटकर पानी की आपूर्ति की जाएगी, जिससे किसी एक सिस्टम के खराब होने पर पूरे शहर को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. वहीं वॉटर मैनेजमेंट के क्षेत्र में सतना को बड़ी उपलब्धि मिली है. स्काडा सिस्टम के जरिए जल प्रबंधन के कारण सतना को देश के 100 स्मार्ट शहरों में पहला स्थान मिला और इसके लिए दिल्ली में सम्मानित किया गया. इसके अलावा इंक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. यहां 80-90 स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जो हजारों लोगों को रोजगार दे रहे हैं.
इस क्षेत्र में की नई पहल
खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए शहर में बड़े स्तर पर काम हुआ है. धवारी स्टेडियम को बीसीसीआई प्रमाणित बनाया गया है जबकि दादा सुखेंद्र सिंह स्टेडियम में 15 से अधिक खेलों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं. 30 करोड़ रुपये की लागत से इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स भी जल्द तैयार होने वाला है, जिसमें लगभग 15 प्रकार के खेलों की सुविधाएं उपलब्ध होंगी. शिक्षा के क्षेत्र में भी नगर निगम ने अहम पहल की है. वर्तमान में 107 सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज संचालित की जा रही हैं, जिससे बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिल रही है. इसके अलावा शहर में कई लाइब्रेरी का निर्माण भी कराया गया है.