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सीहोर स्थित VIT यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में है. NSUI की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भ्रामक प्रचार के आरोपों को गंभीर मानते हुए UGC और मध्यप्रदेश सरकार से जवाब मांगा है. आरोप है कि ‘भोपाल’ नाम का उपयोग कर छात्रों को भ्रमित किया जा रहा है. अब इस मामले में जांच के बाद सख्त कार्रवाई हो सकती है.
सीहोर जिले के आष्टा तहसील के कोठरी गांव में स्थित विश्वविद्यालय को “VIT Bhopal University” नाम से संचालित किया जा रहा है.
भोपाल. मध्यप्रदेश के सीहोर जिले स्थित VIT यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है. इस बार मामला सीधे तौर पर भ्रामक प्रचार और छात्रों को गुमराह करने के आरोपों से जुड़ा है, जिस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने विश्वविद्यालय के नाम में ‘भोपाल’ शब्द के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और इस पूरे मामले में UGC के चेयरमैन तथा मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग से जवाब मांगा है. इस कार्रवाई ने न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि निजी विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
आयोग का मानना है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह छात्रों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन होगा. खासकर उन छात्रों के लिए जो दूसरे राज्यों से यहां पढ़ने आते हैं और नाम के आधार पर संस्थान की लोकेशन को लेकर भ्रमित हो जाते हैं. NHRC ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या शिक्षा संस्थानों को ब्रांडिंग के नाम पर भौगोलिक तथ्यों से समझौता करने की छूट दी जा सकती है.
क्या है पूरा विवाद
NSUI की शिकायत के अनुसार, सीहोर जिले के आष्टा तहसील के कोठरी गांव में स्थित विश्वविद्यालय को “VIT Bhopal University” नाम से संचालित किया जा रहा है. जबकि इसका वास्तविक परिसर भोपाल शहर से करीब 100 किलोमीटर दूर है. शिकायत में कहा गया है कि ‘भोपाल’ नाम का उपयोग कर छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित किया जा रहा है. ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया के दौरान कई छात्र इसे राजधानी भोपाल में स्थित संस्थान समझ लेते हैं.
NHRC ने क्यों लिया संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को छात्रों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना है. आयोग का कहना है कि यदि संस्थान की लोकेशन को लेकर भ्रम पैदा किया गया है, तो यह छात्रों के साथ अन्याय की श्रेणी में आ सकता है. इसी आधार पर आयोग ने UGC और राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और पूछा है कि इस तरह के प्रचार को अनुमति कैसे मिली.
पहले भी विवादों में रहा विश्वविद्यालय
यह पहला मौका नहीं है जब यह विश्वविद्यालय विवादों में आया हो. करीब छह महीने पहले छात्रों के बड़े प्रदर्शन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे. छात्रों ने खराब भोजन, गंदे पानी और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर विरोध जताया था. स्थिति इतनी बिगड़ी कि तोड़फोड़ और आगजनी तक की घटनाएं सामने आई थीं और पुलिस बल तैनात करना पड़ा था.
NSUI की मांगें क्या हैं
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आयोग को दिए गए ज्ञापन में कई मांगें रखी हैं. उन्होंने ‘VIT Bhopal University’ नाम से ‘भोपाल’ शब्द हटाने, विश्वविद्यालय की उच्चस्तरीय जांच कराने और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है.
विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने इस मामले में कहा है कि उन्हें अभी तक किसी प्रकार का नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है. उनका कहना है कि नोटिस राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग को भेजा गया है और वही इसका जवाब देगा. अब सभी की नजर NHRC की अगली कार्रवाई पर है. यदि रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाते हैं, तो विश्वविद्यालय के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है. यह मामला भविष्य में निजी विश्वविद्यालयों की ब्रांडिंग और पारदर्शिता के लिए एक मिसाल बन सकता है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें