दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त किए जाने का नोटिफिकेशन जारी होने से प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे जल्दबाजी और राजनीतिक निर्णय बताया है। हालांकि इन आरोपों के बीच विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों और कानून के तहत की गई है। शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि न्यायालय द्वारा राजेंद्र भारती को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष की सजा सुनाई गई है। ऐसे मामलों में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के अनुसार यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता स्वतः अयोग्य हो जाती है। इसी प्रावधान के तहत यह निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि कोर्ट के फैसले की सूचना मिलने के बाद एक नागरिक, जिनका नाम गौतम बताया गया है, द्वारा भी विधानसभा को पत्र भेजा था। इस पत्र में न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए नियमों के पालन की मांग की गई थी। इसके बाद मामले में विधि विशेषज्ञों और एडवोकेट जनरल से राय ली गई, जिसके आधार पर राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई की गई। इसकी जानकारी चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों को भी दे दी गई है। सजा के बाद अयोग्य घोषित किया विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी मध्य प्रदेश में इसी तरह की परिस्थितियों में विधायकों की सदस्यता समाप्त की जा चुकी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए प्रहलाद लोधी और आशा देवी के मामलों का उल्लेख किया, जिनमें सजा के बाद उनकी सदस्यता अयोग्य घोषित की गई थी। कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वे किसी भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में नहीं पड़ना चाहते। उनका कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष का पद दलगत राजनीति से ऊपर होता है और उन्होंने हमेशा इस पद की गरिमा बनाए रखने का प्रयास किया है। वहीं देर रात विधानसभा में प्रमुख सचिव के पहुंचने को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने बताया कि प्रमुख सचिव किसी कार्य से बाहर थे और रात करीब 9 बजे लौटे। इसके बाद उन्होंने आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई पूरी की। साथ ही उन्होंने कहा कि विधानसभा सभी के लिए खुली है, इसलिए किसी के आने पर आपत्ति का प्रश्न नहीं उठता।
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