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जैक हॉब्स के आंकड़े उनकी महानता की गवाही देते हैं. उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी (First-Class) करियर में कुल 1325 पारियां खेलीं और अविश्वसनीय 61,760 रन बनाए. उन्होंने कुल 199 शतक लगाए, जो प्रथम श्रेणी क्रिकेट के इतिहास में एक विश्व रिकॉर्ड है.
सचिन से पहले जैक हॉब्स का नाम था ‘मास्टर’, प्रथम श्रेणी में लगाए 199 शतक
नई दिल्ली. क्रिकेट के इतिहास में जब भी महानतम बल्लेबाजों की चर्चा होती है, तो सर डोनाल्ड ब्रैडमैन के साथ एक नाम बड़े ही सम्मान से लिया जाता है और वो हैं सर जैक हॉब्स जिन्हें प्यार से ‘द मास्टर’ कहा जाता था, उन्होंने उस दौर में क्रिकेट खेला जब पिचें आज जैसी सपाट नहीं होती थीं और सुरक्षा के साधन (हेलमेट आदि) न के बराबर थे. इसके बावजूद हॉब्स ने जो आंकड़े खड़े किए, वे आज भी किसी सपने जैसे लगते हैं.
जॉन बेरी ‘जैक’ हॉब्स का जन्म 16 दिसंबर 1882 को कैम्ब्रिज में हुआ था. एक गरीब परिवार में जन्मे हॉब्स ने क्रिकेट की बारीकियां खुद सीखीं. उनके करियर की शुरुआत सरे . काउंटी से हुई, जहाँ उन्होंने अपनी तकनीक और धैर्य से सबको हैरान कर दिया. वह एक ऐसे ओपनर थे जो खेल की पहली गेंद से ही अपनी क्लास दिखाना जानते थे.
आंकड़ों का महाकुंभ
जैक हॉब्स के आंकड़े उनकी महानता की गवाही देते हैं. उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी (First-Class) करियर में कुल 1325 पारियां खेलीं और अविश्वसनीय 61,760 रन बनाए. उन्होंने कुल 199 शतक लगाए, जो प्रथम श्रेणी क्रिकेट के इतिहास में एक विश्व रिकॉर्ड है. हॉब्स ने अपने करियर में 20 दोहरे शतक जड़े. उनके नाम 273 अर्धशतक दर्ज हैं. इतनी लंबी पारी खेलने के बावजूद उनका औसत 50.70 का रहा, जो उनकी निरंतरता को दर्शाता है.
खेल की शैली और तकनीक
हॉब्स को उनकी ‘परफेक्ट तकनीक’ के लिए जाना जाता था. वे पिच की परिस्थितियों को पढ़ने में माहिर थे. चाहे वह इंग्लैंड की सीमिंग पिचें हों या ऑस्ट्रेलिया की उछाल भरी जमीन, हॉब्स का फुटवर्क हमेशा सटीक रहता था. उन्होंने 40 साल की उम्र के बाद भी कई शतक जड़े, जिससे साबित होता है कि उनकी फिटनेस और एकाग्रता अद्भुत थी. 1926 की एशेज सीरीज में उनकी और हर्बर्ट सटक्लिफ की साझेदारी आज भी ऐतिहासिक मानी जाती है.
‘नाइटहुड’ पाने वाले पहले क्रिकेटर
क्रिकेट के प्रति उनके समर्पण और उनकी सज्जनता के कारण, 1953 में उन्हें ‘नाइटहुड’ (Sir) की उपाधि से सम्मानित किया गया. वह यह सम्मान पाने वाले दुनिया के पहले पेशेवर क्रिकेटर बने. उन्होंने न केवल रन बनाए बल्कि खेल को एक नई गरिमा प्रदान की. सर जैक हॉब्स केवल एक बल्लेबाज नहीं, बल्कि क्रिकेट की एक संस्था थे. 1934 में जब उन्होंने संन्यास लिया, तब तक वे दुनिया के सबसे बड़े खेल नायक बन चुके थे। आज के दौर में जब खिलाड़ी 100 प्रथम श्रेणी मैच खेलने में संघर्ष करते हैं, हॉब्स के 1300 से अधिक मैच और 199 शतक एक ऐसा शिखर हैं, जिसे छू पाना शायद अब असंभव है. वे हमेशा क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में ‘द मास्टर’ के रूप में जीवित रहेंगे.