शादी में यू-टर्न! डीजे की जगह बजी डफली, बैलगाड़ी पर निकली बारात, दूल्हे राजा ने कही बड़ी बात

शादी में यू-टर्न! डीजे की जगह बजी डफली, बैलगाड़ी पर निकली बारात, दूल्हे राजा ने कही बड़ी बात


Last Updated:

Balaghat Unique Wedding: बालाघाट के कटंगी तहसील के गांव में एक अलग ही नजारा दिखा. यहां पर एक शादी में डीजे का शोर नहीं, बल्कि बांसुरी की मधुर गूंज थी, डफली की आवाज लोगों को थिरकने पर मजबूर कर रही थी.

Balaghat News: पुराना दौर हो या आज का… हर दौर में शादी एक उत्सव रही है. लेकिन, बदलाव एक ये आया कि पहले के मुकाबले अब शादियों में खर्च काफी बढ़ गए. दिखावे की दौड़ में शादियों में अंधाधुंध खर्च कई बार मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए समस्या भी बन जाता है. इस तौर-तरीके ने कर्ज लेने की आदत को भी बढ़ा दिया है. लेकिन, अब कुछ लोग यू-टर्न मार रहे हैं.

बालाघाट के कटंगी तहसील के गांव में एक अलग ही नजारा दिखा. यहां पर एक शादी में डीजे का शोर नहीं, बल्कि बांसुरी की मधुर गूंज थी, डफली की आवाज लोगों को थिरकने पर मजबूर कर रही थी. वहीं, बैलगाड़ी पर आई बारात को तो सब देखते ही रह गए. लोकल 18 की टीम भी मौके पर पहुंची. फिर जो वजह सामने आई वो चौंकाने वाली थी.

अनोखी बारात बनी आकर्षण का केंद्र
बालाघाट में सेलवा गांव में नवरदेव अंकित देशमुख की बारात 10 किलोमीटर दूर सीताखोह गांव तक गई. ऐसे में जब बारात घर से निकली तो ग्रामीण देखने के लिए आतुर हो गए. इस बारात में न तो लग्जरी वाहन थे, न ही आधुनिक डीजे. बैलगाड़ी पर बारात सबको चौंका रही थी.

बैलों को भी सजाया गया था
शाम का वक्त था, जब बैलगाड़ियों को सजाया गया. सभी ने अपनी खाचर तैयार की. वहीं, बैल भी कम नहीं लग रहे थे. इस बारात में सिर्फ दूल्हा ही नहीं, बैल भी सजधज कर तैयार थे. सबके गले में घोलर और पीठ पर पर्दा नुमा कपड़ा, जो बैलों को और भी खास और आकर्षित बनाते हैं. जब बारात निकली, तो नजारा देखने लायक था.

पारंपरिक संगीत ने बिखेरा जलवा
डीजे के शोर से इतर बालाघाट के प्राचीन वाद्य यंत्रों की धुन सुनाई दी. पारंपरिक तरीके से यह डफली और बांसुरी बजाने वाला एक समुदाय है. डफली वादक बताते हैं कि आज से 15 साल पहले काम ठीक चलता था. लेकिन, समय के साथ आधुनिकता की चकाचौंध में हम गायब से हो गए थे. लेकिन, बीते कुछ सालों में एक बदलाव नजर आया और फिर से लोग हमारी ओर लौट रहे हैं. ये काफी सुखद है. वहीं, हमारी पार्टी में 10 से ज्यादा सदस्य हैं. हमें साल भर अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए रोजगार मिलता है. एक साल में 60 शादियों में चले जाते हैं.

यादें ताजा हो गईं
एक बुजुर्ग का कहना है कि अब से करीब 40 पहले शादी हुई थी. उनका कहना है कि ऐसे ही उनकी बारात गई थी. तब भी ऐसा ही माहौल था. ये सब देखकर सारी यादें ताजा सी हो गई. ये एक अच्छी पहल है, जिससे परंपराओं को सहेजा जा सकता है. ऐसे में यह एक अच्छी पहल है.

About the Author

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



Source link