अभी काट नहीं पाए गेहूं? बेमौसम बारिश का अलर्ट तो किसान तुरंत करें ये काम, बचेगा नुकासन

अभी काट नहीं पाए गेहूं? बेमौसम बारिश का अलर्ट तो किसान तुरंत करें ये काम, बचेगा नुकासन


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काट नहीं पाए गेहूं? बेमौसम बारिश का अलर्ट तो तुरंत करें ये काम, बचेगा नुकसान

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Agri Tips: मध्य प्रदेश में बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. अप्रैल की तेज गर्मी के बाद पश्चिमी विक्षोभ के असर से सीधी जिले में लगातार बारिश, तेज हवाएं और आंधी-तूफान हो रहे हैं. इसका सबसे ज्यादा असर गेहूं सहित खड़ी फसलों पर पड़ रहा है, जिससे नुकसान की आशंका बढ़ गई है और किसान परेशान हैं.

बारिश और तेज हवाएं किसानों के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं. लगातार बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति है, जिससे फसलों की जड़ें सड़ने लगती हैं. वृद्धि रुक जाती है. वहीं तेज हवाओं के कारण फसल गिर सकती है, जिसे लॉजिंग कहा जाता है. गिरी फसल के दाने खराब होने लगते हैं और पैदावार घटती है. अधिक नमी से येलो रस्ट और ब्लैक रस्ट जैसे फंगल रोगों का खतरा भी बढ़ रहा है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. वेद प्रकाश सिंह ने लोकल 18 को बताया कि बारिश के बाद किसानों को खेतों में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. इसके लिए नालियों की साफ-सफाई करें और जहां पानी भर जाए, वहां तुरंत निकासी की व्यवस्था करें, ताकि फसल की जड़ों को नुकसान न पहुंचे और रोगों का खतरा कम रहे. तेज हवाओं से अगर गेहूं या अन्य फसल झुक जाए तो उन्हें सहारा देना जरूरी है. इसके लिए लकड़ी या बांस के सहारे लगाए जा सकते हैं, जिससे फसल सुरक्षित रहती है और दानों के खराब होने की आशंका कम हो जाती है.

नमी और बारिश के कारण फसलों में रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में किसानों को समय रहते फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही उपचार शुरू कर देना जरूरी है.

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बारिश के बाद किसानों को कुछ दिनों तक सिंचाई नहीं करनी चाहिए. अधिक नमी से फसल की जड़ें कमजोर होती हैं और रोगों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सतर्क रहें.

मौसम विभाग के अलर्ट पर ध्यान देना जरूरी है. 1 से 10 अप्रैल तक बारिश और तेज हवाओं की संभावना है, इसलिए किसान कटाई, खाद और दवा छिड़काव जैसे काम मौसम देखकर योजना बनाकर करें.

जहां फसल पक चुकी है, मौसम साफ होते ही तुरंत कटाई करें. देरी से बारिश और तेज हवाओं के कारण फसल गिरकर दाने खराब हो सकते हैं.

छोटे पौधों को बचाने के लिए सहारा देने वाली ढांचियां या तार का जाल लगाएं. फसल में उचित दूरी रखें, ताकि पानी निकासी आसान हो सके. बड़े किसान पंप और ड्रेनेज सिस्टम तैयार रखें, जिससे बारिश का पानी निकालने और जरूरत पड़ने पर स्टोर करने में आसानी हो सके.



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