35 साल बाद नक्सलवाद खत्म… फिर भी बढ़ रहे पुलिस कैंप! आखिर क्यों, जानें वजह

35 साल बाद नक्सलवाद खत्म… फिर भी बढ़ रहे पुलिस कैंप! आखिर क्यों, जानें वजह


Balaghat News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले ने करीब 35 साल बाद नक्सलवाद से राहत पाई है. सरकार की तय डेडलाइन से पहले ही यह बड़ी सफलता हासिल हुई. लेकिन अब एक नया सवाल खड़ा हो गया है जब नक्सलवाद खत्म हो चुका है, तो फिर लगातार नए पुलिस कैंप और चौकियां क्यों खोली जा रही हैं?

क्यों बढ़ाई जा रही सुरक्षा?
दरअसल, सरकार अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. बीते साल बनाए गए एक्शन प्लान के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार सुरक्षा बढ़ाई गई. इसी के तहत 23 हॉक फोर्स, 20 सीआरपीएफ और 12 अस्थायी पुलिस कैंप पहले ही बनाए जा चुके हैं, और अब भी नए कैंप खोले जा रहे हैं. इनका मकसद साफ है नक्सलवाद दोबारा सिर न उठा सके.

फिर से न पनपे ये विचारधारा
बालाघाट एंटी नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्श कांत शुक्ला के मुताबिक, ये कैंप उन इलाकों में बनाए जा रहे हैं जहां पहले नक्सलियों की गतिविधियां ज्यादा थीं. करीब 145 सहयोगियों के नेटवर्क को देखते हुए पुलिस अब हर गतिविधि पर नजर रखना चाहती है, ताकि फिर से ये विचारधारा जड़ न पकड़ सके.

सिर्फ सुरक्षा नहीं, सुविधा भी
दिलचस्प बात ये है कि ये पुलिस कैंप सिर्फ सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए सेवा केंद्र की तरह भी काम करेंगे. यहां आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड और वनाधिकार पट्टा जैसे काम भी आसानी से हो सकेंगे. यानी अब ये कैंप गांवों में छोटी-छोटी सरकारी सेवाओं का भी केंद्र बनेंगे.

ग्रामीणों की अलग चिंता
हालांकि ग्रामीणों का नजरिया थोड़ा अलग है. उनका कहना है कि पुलिस चौकी खुलने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, इससे इलाके में शांति बनी रहेगी. लेकिन उनकी सबसे बड़ी जरूरत अस्पताल, डॉक्टर और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं हैं, जो अभी भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं. लोग चाहते हैं कि सरकार सुरक्षा के साथ-साथ इन जरूरी सुविधाओं पर भी ध्यान दे.

आगे की राह
बालाघाट अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां डर की जगह उम्मीद ने ले ली है. लेकिन असली बदलाव तभी होगा, जब सुरक्षा के साथ-साथ विकास और बुनियादी सुविधाएं भी गांव-गांव तक पहुंचें.



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