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मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों की फीस में लगातार भारी बढ़ोतरी से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और फीस बढ़ाने को लेकर माता-पिता काफी परेशान हैं. अभिभावकों का कहना है कि महंगाई से ज्यादा दर से स्कूल की फीस बढ़ती जा रही है. अब फीस बढ़ने से उनकी कमर टूट रही है.
मध्य प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों के फीस बढ़ाने को लेकर अभिभावक परेशान
मध्यप्रदेश के निजी स्कूलों में हर साल मनमाने तरीके से बढ़ रही फीस और किसी खास दुकान से बच्चों की किताब, यूनिफार्म और जूते खरीदने को लेकर अभिभावकों को खासी शिकायत है. स्मृति की बेटी तीसरी क्लास में और आस्तिक उदेनिया का बेटा छठवीं क्लास में और शैलेंद्र रावत का बेटा बारहवीं क्लास में भोपाल के प्रतिष्ठित स्कूलों में पढ़ते हैं. माता पिता का कहना है कि महंगाई से ज्यादा दर से स्कूल की फीस हर साल बढ़ती जा रही है. खास दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म और शू उपलब्ध कराने के रैकेट चल रहे हैं. इसी को लेकर पेरेंट्स ने अपनी व्यथा बताई है.
महंगी फीस लेकर माता-पिता परेशान हैं और स्मृति ने कहा कि मेरी बेटी तीसरी क्लास में पढ़ती है. हमें काफी फर्क पड़ता है. अभिभावकों और स्कूल का ग्रुप हो जिसके आधार पर फीस बढ़े.
आस्तिक उदेनिया ने कहा कि मेरा बेटा छठवीं क्लास में आया है. कहीं कहीं स्कूल में हर साल अलग से एडमीशन फीस ले रहे हैं. बच्चे एक बार एक स्कूल में डालते हैं. हर क्लास अपग्रेड करने पर फीस बढ़ा रहे हैं. 25000 का फर्क पांचवी से छठवीं जाने में बीस से पच्चीस फीसदी फर्क.
शैलेंद्र रावत का बेटा बारहवीं क्लास में पढ़ता है. उन्होंने कहा कि 11 से बारवीं गया तो खूब फीस बढ़ा दी. स्कूल में उतनी सुविधाएं नहीं. सरकार की सख्त गाइडलाइन होनी चाहिए. एनसीआरटी की किताब सस्ती हैं. प्राइवेट बुक महंगी हैं. पेरेंट्स को नोचने के लिए बैठे हैं. पेरेंट्स तो ग्राहक हैं. स्कूल की तरफ से जैसा कहा जाता है. पेरेंट्स की मजबूरी है और उन पर प्रेशर बनता जा रहा है. स्कूल बताए कि किस पैमाने पर फीस बढ़ाई गई है.