टेस्ट क्रिकेट को कभी बेहद सुस्त तरीके से बेहद संभलकर खेला जाता था. बल्लेबाज ज्यादा से ज्यादा वक्त क्रीज पर बिताते थे लेकिन रन कम से कम बना करते थे. भारतीय टीम को विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने इसे भी तूफानी अंदाज में खेलना शुरू किया और मुकाबलों में रोमांच भर दिया. लंबे समय तक उनके नाम सबसे ज्यादा टेस्ट छक्कों का रिकॉर्ड था. अब भारत की तरफ से टेस्ट में सबसे ज्यादा सिक्स ऋषभ पंत के नाम दर्ज हैं.
ऋषभ पंत इस सूची में सबसे आधुनिक नाम हैं. वह 30 साल की उम्र से पहले ही भारत के सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं. पंत की खासियत उनकी बेखौफ बल्लेबाजी में है. चाहे इंग्लैंड के लॉर्ड्स मैदान पर जेम्स एंडरसन के खिलाफ आगे बढ़कर खेलना हो या पैट कमिंस के खिलाफ रिवर्स स्कूप लगाना, यह बाएं हाथ का बल्लेबाज हमेशा जोखिम उठाने में माहिर है. उन पर कभी-कभी लापरवाही से विकेट गंवाने का आरोप भी लगा है, लेकिन उनका आक्रामक अंदाज, शानदार नजर और बेझिझक हिम्मत उन्हें देखने लायक बनाती है. महज 49 टेस्ट मैच खेलकर ऋषभ पंत 94 छक्के लगा चुके हैं.
इस सूची में दूसरे नंबर पर हैं ओपनर वीरेंद्र सहवाग. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए बल्लेबाजी का तरीका बदल दिया. इंग्लैंड की ‘बाजबॉल’ रणनीति के आने से बहुत पहले ही सहवाग ने आक्रामक टेस्ट क्रिकेट का खाका तैयार कर दिया था. अपनी बेखौफ और जबरदस्त स्ट्रोकप्ले के लिए मशहूर सहवाग नई गेंद का सामना करने में भी उतने ही सहज थे, जितना स्पिनरों को स्टैंड्स में भेजने में. सहवाग के 90 छक्के 82 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट पर आए. उनकी जोखिम लेने की आदत ने उन्हें मैच विनर बना दिया. सहवाग भारत के लिए टेस्ट में तिहरा शतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज बने.
इसी सूची में दूसरे स्थान पर पूर्व कप्तान रोहित शर्मा भी हैं, जिन्होंने टेस्ट में 88 बार गेंद को सीमा पार पहुंचाया है. वनडे और टी20 में छक्कों की उनकी पहचान पहले से ही थी, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उन्हें जमने में वक्त लगा. 2019 में ओपनिंग शुरू करने के बाद उनका टेस्ट करियर बदल गया. रोहित ने अपनी बल्लेबाजी में खूबसूरती और ताकत का मेल दिखाया. टेस्ट में उनका स्ट्राइक रेट भले ही सीमित ओवरों की तुलना में कम हो, लेकिन स्पिनरों को मिडविकेट के ऊपर या कवर के ऊपर से छक्का मारने की उनकी काबिलियत आखिरी तक बरकरार रही.
इस लिस्ट में एक और चौंकाने वाला नाम है रवींद्र जडेजा. उन्होंने साल दर साल अपने प्रदर्शन को बतौर टेस्ट ऑलराउंडर बेहतर किया. कभी उन्हें एक साधारण खिलाड़ी माना जाता था लेकिन धीरे धीरे वो टीम की जान बन गए. उनके 82 छक्के दिखाते हैं कि अब उन्हें अपनी बल्लेबाजी पर पूरा भरोसा है.
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट क्रिकेट में भी वही बेबाक अंदाज में बल्लेबाजी की. उनके 78 छक्के अक्सर अहम मौकों पर आए, धोनी ने भले ही विदेशी पिचों पर हमेशा दबदबा न बनाया हो, लेकिन जब हालात उनके अनुकूल रहे तो वह खतरनाक बल्लेबाज साबित हुए. उनके हेलिकॉप्टर शॉट्स और सिग्नेचर फ्लिक्स सिर्फ वनडे तक सीमित नहीं थे, टेस्ट गेंदबाजों को भी उनका सामना करना पड़ा.
लिटिल मास्टर सचिन तेंदुलकर को छक्के लगाने के लिए नहीं जाना जाता था. अपने शानदार टेस्ट करियर में उन्होंने 69 छक्के लगाए. 300 से ज्यादा पारियों में तेंदुलकर ने सही मौके पर छक्के लगाए. उनके छक्के अक्सर खूबसूरती से टाइम किए गए सीधे शॉट्स या डीप स्क्वायर के ऊपर से फ्लिक के रूप में आते थे. 90 के दशक की सीमिंग पिचों से लेकर 2000 के दशक की स्पिनिंग पिचों तक हर हालात में खुद को ढाल लिया.
इस सूची को पूरा करते हैं महान कपिल देव जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट को आजादी और जोश के साथ खेला. करीब 80 के स्ट्राइक रेट के साथ उन्होंने उस दौर में आक्रामकता दिखाई, जब ऐसा खेल कम ही देखने को मिलता था. गेंदबाज के तौर पर ज्यादा पहचाने जाने वाले कपिल देव बल्लेबाजी में भी बेखौफ थे.