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Baglamukhi Dham: धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान श्री राम की अब झलक देखने को मिल रही है. उज्जैन के बगलामुखी धाम में अयोध्या की तर्ज पर रामलला की स्थापना की गई. इस प्रतिमा में हूबहू रामलला की झलक देखने को मिल रही है. आइए जानते हैं प्रतिमा की खासियत…
Baglamukhi Dham: धार्मिक नगरी उज्जैन में रामनवमी का दिन जैसे आस्था की रोशनी से जगमगा उठा, सुबह होते ही मंदिरों की घंटियों की मधुर ध्वनि और “जय श्रीराम” के जयकारों से पूरा शहर गूंजने लगा. हर गली, हर मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी थी, जहां लोग श्रद्धा से पूजन-अर्चन और भजन-कीर्तन में लीन नजर आए. इसी पावन अवसर पर बगलामुखी धाम में एक खास दृश्य देखने को मिला. यहां भगवान श्रीराम की नई प्रतिमा की भव्य प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया. यह प्रतिमा अयोध्या के रामलला के स्वरूप से प्रेरित थी, जिसे दक्षिण भारत के कुशल शिल्पकारों ने बेहद बारीकी और भक्ति भाव से तैयार किया था. जैसे ही विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा पूरी हुई, पूरा परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा. श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति और खुशी साफ झलक रही थी, मानो खुद प्रभु राम उनके बीच विराजमान हो गए हों.
101 बटुकों ने किया वातावरण पवित्र
मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति की लहर दौड़ रही थी. वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच 101 बटुकों ने श्रद्धा और नियम के साथ अनुष्ठान शुरू किया. हर मंत्र के साथ वातावरण और भी पवित्र होता गया. तय शुभ मुहूर्त पर भगवान राम की प्रतिमा में विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा की गई. जैसे ही अनुष्ठान पूर्ण हुआ, पूरा धाम जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा और हर भक्त भाव-विभोर नजर आया.
शुभ मुहूर्त में हुईं स्थापना
बगलामुखी धाम के गादीपति योगी पीर महंत रामनाथ महाराज ने बताया कि हिंदू धर्म में रामनवमी का पर्व बेहद खास महत्व रखता है. इस दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है. उन्होंने कहा कि भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, क्योंकि उनका जीवन आदर्शों, सत्य और धर्म पर आधारित था. वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं और उनका संपूर्ण जीवन मानव समाज को सही मार्ग दिखाने का संदेश देता है, जिसे रामायण के माध्यम से सहज रूप से समझा जा सकता है. महंत रामनाथ महाराज ने आगे बताया कि इस पावन अवसर को और भी विशेष बनाने के लिए भगवान श्रीराम की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया. इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. पूरे धाम में “जय श्रीराम” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो गया, जिससे हर कोई भक्ति में सराबोर नजर आया.
प्रतिमा को बता रहे है श्रद्धालु खास
अयोध्या की तर्ज पर उज्जैन में जो रामलला विराजमान हुए है. वह मध्यप्रदेश की पहली प्रतिमा बताई जा रही है. जिसमें भगवान राम की जिस प्रकार अयोध्या में प्रतिमा स्थापित हुईं है, वैसे ही बगलामुखी धाम में भी प्रतिमा स्थापित की गई है. साथ ही यहा भव्य हनुमान जी की प्रतिमा भी बैठाई गई है. जो की हनुमान गढ़ी से मिलती है. अब श्रद्धालुओं को उज्जैन में ही रामलला के दर्शन हो सकेंगे.
प्रतिमा की खासियत जानिए
बगलामुखी धाम मे जो रामलला विराजमान किए गए है. वह स्पेशल पत्थर से तैयार किए गए है. यह प्रतिमा जेड ब्लैक (Z Black) या जेट ब्लैक ग्रेनाइट दक्षिण भारत की खदानों से निकाला जाने वाला एक प्रीमियम, गहरा काला और अत्यधिक टिकाऊ प्राकृतिक पत्थर है. इस प्रतिमा को तैयार करने में जयपुर के कारीगरों को करीब दो माह का समय लगा है. जिसकी कीमत दो से ढ़ाई लाख बताई जा रही है. अपनी सघन संरचना और दर्पण जैसी चमक के कारण, यह जयपुर में घर के अंदर और बाहर के लिए सबसे लोकप्रिय पथर माना जाता है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें