जबलपुर के शहीद स्मारक भवन स्थित गोलबाजार में चल रहा 12 दिवसीय पुस्तक मेला एक बार फिर चर्चा में है। पूर्व मंत्री और पाटन विधायक अजय बिश्नोई ने शनिवार रात मेले का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर मेले की वर्तमान व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “निजाम बदला, मिजाज बदल गया।” 2 साल पहले तत्कालीन कलेक्टर ने की थी शुरुआत बिश्नोई ने अपनी पोस्ट में बताया कि साल 2024 में तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने निजी स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के कथित गठजोड़ को रोकने के लिए पुस्तक मेले की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और अभिभावकों को पाठ्यपुस्तकें कम दाम पर उपलब्ध कराना था। उस समय इस पहल की व्यापक सराहना हुई थी, और बाद में इस मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी अपनाया गया था। सिर्फ कॉपियों पर ही छूट विधायक ने आरोप लगाया कि वर्तमान प्रशासन की मेले से दूरी के कारण पुस्तक विक्रेताओं के हौसले बढ़े हैं। उनके अनुसार, इस बार पुस्तकों के सेट ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस बार पुस्तक मेले में यदि कुछ सस्ता मिल रहा है, तो वह केवल कॉपियां हैं, जिन पर 60 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। बिश्नोई ने अभिभावकों को सलाह दी कि बाजार में कॉपी खरीदते समय उसके छपे मूल्य पर ध्यान दें, क्योंकि वास्तविक कीमत अक्सर अंकित मूल्य से काफी कम होती है। बता दें कि विधायक अजय बिश्नोई इससे पहले भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सरकार के विभिन्न कार्यों को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते रहे हैं।
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