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Watermelon Farming Tips: किसान अगर शुरुआती अवस्था में ही सावधानी बरतें, तो इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है. सुंडी से बचाव के लिए नीम का तेल और अन्य जैविक कीटनाशकों का इस्तेमाल प्रभावी साबित हो सकता है.
सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर नकदी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों में तरबूज की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभरी है लेकिन इस बार बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. तापमान में उतार-चढ़ाव और बेमौसम बारिश के कारण तरबूज की फसल में कीट और रोगों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है. सीधी निवासी किसान सलाहकार अवनीश पटेल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस समय तरबूज की फसल पर सुंडी और पीला मरोड़ जैसी समस्याएं तेजी से फैल रही हैं. सुंडी पत्तियों और फलों को खाकर नुकसान पहुंचाती है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं. वहीं पीला मरोड़ एक फंगस जनित बीमारी है, जो पत्तियों को पीला कर देती है और धीरे-धीरे पूरी फसल को कमजोर बना देती है.
उन्होंने बताया कि शुरुआती लक्षणों में पत्तियों पर छोटे-छोटे पीले और गीले धब्बे दिखाई देते हैं, जो समय के साथ बड़े और गहरे हो जाते हैं. अगर समय रहते इसका उपचार नहीं किया गया, तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है. सुंडी के हमले से पत्तियां छिद्रित हो जाती हैं और फल भी खराब होने लगते हैं, जिससे बाजार में उनका दाम कम मिल पाता है.
शुरुआती अवस्था में ही बरतें सावधानी
अवनीश पटेल के अनुसार, किसान यदि शुरुआती अवस्था में ही सावधानी बरतें, तो इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है. सुंडी से बचाव के लिए नीम का तेल और अन्य जैविक कीटनाशकों का उपयोग प्रभावी साबित हो सकता है. वहीं रासायनिक नियंत्रण के लिए स्पिनेटोरम 11.7% एससी दवा का छिड़काव करने की सलाह दी गई है. यह दवा स्पिनोसिन समूह की कीटनाशक है, जो पत्तियों को खाने वाले, तना छेदने वाले और फल छेदने वाले कीड़ों पर तेजी से असर दिखाती है. यह दवा कीटों को जल्दी खत्म करने के साथ लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है. हालांकि किसानों को दवा का उपयोग विशेषज्ञ की सलाह और सही मात्रा में ही करना चाहिए ताकि फसल और मिट्टी दोनों सुरक्षित रहें.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.