बुरहानपुर और नेपानगर में रविवार को ईसाई समुदाय ने प्रभु यीशु के पुनरुत्थान की खुशी में ईस्टर संडे मनाया। इस अवसर पर चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं और शनिवार देर रात नेपानगर में मोमबत्ती जुलूस निकाला गया। पास्का जागरण के दौरान चकमक पत्थर से नई अग्नि प्रज्वलित की गई और नया आशीष जल तैयार किया गया। प्रार्थना और मिस्सा बलिदान के बाद समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को ईसा मसीह के जीवित होने की बधाई देते हुए उबले अंडे वितरित किए। चकमक पत्थर से जलाई नई अग्नि, मोमबत्ती जुलूस निकाला समुदाय के सदस्यों के अनुसार, शनिवार रात 12 बजे पास्का जागरण का मिस्सा आयोजित किया गया। इस दौरान एक नई अग्नि प्रज्वलित की गई, जिसके लिए चकमक पत्थर का उपयोग किया गया। इसमें माचिस का प्रयोग वर्जित था। इसके बाद एक मोमबत्ती जुलूस निकाला गया। जुलूस के दौरान चर्च की सभी लाइटें बंद कर दी गईं। उपस्थित सभी लोगों ने प्रज्वलित नई अग्नि से अपनी-अपनी मोमबत्तियां जलाईं। पल्ली पुरोहित एक बड़ी मोमबत्ती लेकर जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे। रात 12 बजे जलीं चर्च की लाइटें, तैयार किया आशीष जल रात ठीक 12 बजे चर्च की सभी लाइटें पुनः जला दी गईं। प्रतीक के रूप में बनाई गई गुफा से कपड़ा हटाया गया। पल्ली पुरोहित द्वारा नया आशीष जल तैयार किया गया, जिसमें नमक मिलाया गया और फिर जलती मोमबत्ती को डुबोकर निकाला गया। इस पवित्र जल का उपयोग साल भर धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। मिस्सा बलिदान के बाद बांटे उबले अंडे, यीशु को किया स्मरण पल्ली पुरोहित ने पवित्र मिस्सा बलिदान चढ़ाया। अंत में, ईसा मसीह के जीवित होने की बधाई देते हुए सभी को उबले अंडे वितरित किए गए। यह ईसा मसीह के जी उठने और मानव कल्याण के लिए उनके संदेश का प्रतीक है। रविवार को बुरहानपुर और नेपानगर के चर्चों में ईस्टर संडे के उपलक्ष्य में विशेष प्रार्थनाएं की गईं। इस दौरान प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाए जाने के तीन दिन बाद उनके जीवित होने और मानव कल्याण के लिए दिए गए संदेशों को स्मरण किया गया। देखिए तस्वीरें…
Source link