सूख रहा पशुओं का दूध? पूरे गांव में फैल सकता है रोग, खंडवा में मुफ्त वैक्सीन

सूख रहा पशुओं का दूध? पूरे गांव में फैल सकता है रोग, खंडवा में मुफ्त वैक्सीन


खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में इन दिनों पशुओं में फैलने वाली खतरनाक बीमारी खुरपका-मुंहपका (FMD) को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. यह बीमारी इतनी तेजी से फैलती है कि अगर एक पशु संक्रमित हो जाए, तो पूरे गांव के पशु इसकी चपेट में आ सकते हैं. समय पर इलाज न मिलने पर कई बार पशु की मौत तक हो जाती है. इस बीमारी का सबसे पहला असर पशुओं के दूध पर पड़ता है. बीमार होने पर पशु चारा खाना छोड़ देता है और दूध देना कम या पूरी तरह बंद कर देता है. ऐसे में पशुपालकों की आमदनी पर सीधा असर पड़ता है और भारी नुकसान उठाना पड़ता है.

पशुपालकों को राहत देने के लिए खंडवा जिले में राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है. यह अभियान 1 अप्रैल से 15 मई तक चलाया जा रहा है. इस दौरान गांव-गांव जाकर पशुओं को मुफ्त वैक्सीन लगाई जा रही है.

4 महीने से बड़े पशुओं को लग रहा टीका
डॉक्टरों के अनुसार, चार महीने से अधिक उम्र के सभी गाय और भैंसों को यह टीका लगाया जा रहा है. यह टीकाकरण पूरी तरह निशुल्क है और पशुपालन विभाग की टीम घर-घर पहुंचकर यह काम कर रही है.

बीमारी के लक्षण जानना जरूरी
पशु चिकित्सक हेमंत शाह के अनुसार, खुरपका-मुंहपका बीमारी में पशु के मुंह और पैरों में छाले हो जाते हैं. पशु को तेज बुखार आता है, वह लंगड़ाने लगता है और चारा खाना छोड़ देता है. धीरे-धीरे दूध की मात्रा कम हो जाती है या पूरी तरह सूख जाती है.

समय पर टीका ही सबसे बड़ा बचाव
उनका कहना है कि इस बीमारी का इलाज मुश्किल और महंगा होता है लेकिन अगर समय पर टीकाकरण करा लिया जाए, तो इससे पूरी तरह बचाव संभव है, इसलिए सभी पशुपालकों को अपने पशुओं का टीका जरूर लगवाना चाहिए.

पहचान के लिए कान में लगाया जाता है छल्ला
टीकाकरण के बाद पशु के कान में पीले रंग का छल्ला लगाया जाता है. यह इस बात की पहचान होती है कि पशु को वैक्सीन लग चुकी है. विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे इस छल्ले को न हटाएं.

हर 6 महीने में जरूरी होता है टीकाकरण
यह टीका हर छह महीने के अंतराल पर लगाया जाता है. नियमित टीकाकरण से पशु लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और बीमारी का खतरा कम हो जाता है.

डिजिटल सिस्टम से होगी निगरानी
पशुपालन विभाग ने अब सेवाओं को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था भी शुरू की है. जरूरत पड़ने पर फील्ड कर्मचारी पशुपालकों से आधार और मोबाइल नंबर भी ले सकते हैं. साथ ही 1962 ऐप के जरिए भी पशुपालक अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं.

अगर समय रहते पशुओं का टीकाकरण करवा लिया जाए, तो खुरपका-मुंहपका जैसी खतरनाक बीमारी से बचाव संभव है. इससे पशु स्वस्थ रहेंगे, दूध उत्पादन बना रहेगा और पशुपालकों की आमदनी भी सुरक्षित रहेगी.



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