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Veshakh Masik Shivratri April 2026: वैशाख माह की मासिक शिवरात्रि इस बार विशेष महत्व लेकर आ रही है. उज्जैन के आचार्य के अनुसार, इस दिन बन रहे शुभ संयोग इसे और भी फलदायी बना रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं शिवरात्रि का सही मुहूर्त, पूजन विधि और इसका आध्यात्मिक महत्व.
उज्जैन. हर महीने आने वाली मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है. यह दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ता है, जो महादेव और माता पार्वती को समर्पित होता है. इस अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करते हैं और व्रत रखकर अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और इच्छित फल प्राप्त होता है. सुहागिन महिलाओं के दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है, वहीं अविवाहित लोगों के विवाह के योग भी मजबूत होते हैं. इस बार मासिक शिवरात्रि पर विशेष शुभ संयोग बन रहे हैं, जो इसे और भी खास बना रहे हैं.
कब मनाई जाएगी चैत्र माह की शिवरात्रि
शास्त्रों के अनुसार, इस साल वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 अप्रैल दिन बुधवार को रात्रि 10 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन 16 अप्रैल दिन गुरुवार को शाम 8 बजकर 11 मिनट पर होगा. ऐसे में निशिता पूजा मुहूर्त के आधार पर मार्च की मासिक शिवरात्रि 15 अप्रैल बुधवार को मनाई जाएगी.
मासिक शिवरात्रि व्रत के लाभ
ऐसी मान्यता है कि शिव मंत्रों का जाप शिवालय या घर के पूर्व भाग में बैठकर करने से अधिक फल प्राप्त होता है. मासिक शिवरात्रि की पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिए. मासिक शिवरात्रि का व्रत जो भी भक्त पूरे श्रद्धाभाव से करता है, उसके माता-पिता के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. साथ ही स्वयं के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उस व्यक्ति जीवन को जीवन के सारे सुख प्राप्त होते हैं. इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य और संतान आदि प्राप्त करता है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.
जरूर करें इन नियमों का पालन
मासिक शिवरात्रि व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्य देव को अर्घ देकर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेल पत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें. फिर पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. उसके बाद शिव मंत्रो का जाप अवश्य करे.
जरूर करें इन मंत्रों का जाप
– ऊं त्रिदलं त्रिगुणाकारम त्रिनेत्रम च त्रिधायुतम्। त्रिजन्म पाप संहारम एक बिल्व शिवार्पणम।
– ऊं शिवाय नम:-ऊं सर्वात्मने नम:– ऊं त्रिनेत्राय नम:
– ॐ शंभ सदाशिव नमो नमः
– ऊं हराय नम:– ऊं इन्द्रमुखाय नम:
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें