नई दिल्ली. टी20 क्रिकेट की दुनिया में एक कहावत मशहूर है कि कप्तान वही जो सामने से लीड करे. जब एक कप्तान के बल्ले से रन निकलते हैं, तो पूरी टीम का मनोबल सातवें आसमान पर होता है. टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसी पारियां खेली गई हैं, जहां कप्तानों ने न सिर्फ मैच जिताए, बल्कि बल्लेबाजी के ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए जिन्हें तोड़ना नामुमकिन सा लगता है. उन पांच कप्तानों के बारे में जानते हैं जिन्होंने एक पारी में रनों का एवरेस्ट खड़ा कर दिया.
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान एरॉन फिंच (Aaron Finch) का नाम इस लिस्ट में सबसे ऊपर आता है. 3 जुलाई 2018 को जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे के मैदान पर फिंच ने जो किया, वह क्रिकेट इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया. उन्होंने महज 76 गेंदों का सामना करते हुए 172 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली. यह न केवल एक कप्तान द्वारा, बल्कि टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है. फिंच की इस पारी में 16 चौके और 10 गगनचुंबी छक्के शामिल थे. उनका 226.31 का स्ट्राइक रेट यह बताने के लिए काफी था कि उस दिन जिम्बाब्वे के गेंदबाज सिर्फ मूकदर्शक बने हुए थे. फिंच की यह पारी एक मिसाल है कि कैसे एक सलामी बल्लेबाज के तौर पर कप्तान मैच को विपक्षी टीम से पूरी तरह छीन सकता है.
टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले दुनिया के 5 कप्तान.
सिकंदर रजा ने लिखी रिकॉर्ड्स की नई इबारत
जिम्बाब्वे के करिश्माई कप्तान सिकंदर रजा (Sikandar Raza) ने 23 अक्टूबर 2024 को नैरोबी के मैदान पर जो तबाही मचाई, उसने आंकड़ों के जानकारों को भी हैरान कर दिया. गाम्बिया के खिलाफ खेलते हुए रजा ने सिर्फ 43 गेंदों में 133 रनों की नाबाद पारी खेली. हालांकि रनों के मामले में वह फिंच से पीछे रह गए, लेकिन उनका 309.30 का स्ट्राइक रेट इस पूरी लिस्ट में सबसे खतरनाक है. रजा ने अपनी पारी में मात्र 7 चौके लगाए, लेकिन रिकॉर्ड 15 छक्के जड़कर उन्होंने बाउंड्री के जरिए गाम्बिया के गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस कर दिया. रजा की यह पारी दिखाती है कि आधुनिक टी20 में स्ट्राइक रेट ही असली ताकत है.
बेल्जियम के नए हीरो शहरयार बट
क्रिकेट की बड़ी शक्तियों के बीच बेल्जियम के कप्तान शहरयार बट का नाम इस लिस्ट में होना सुखद आश्चर्य पैदा करता है. 29 अगस्त 2020 को चेक रिपब्लिक के खिलाफ शहरयार ने महज 50 गेंदों पर नाबाद 125 रन बनाए. उनकी इस पारी की खास बात यह थी कि उन्होंने मैदान के हर कोने में रन बटोरे. 11 चौके और 9 छक्कों से सजी इस पारी में उनका स्ट्राइक रेट 250.00 का रहा. यह पारी साबित करती है कि प्रतिभा किसी बड़े बोर्ड या देश की मोहताज नहीं होती. शहरयार ने एक कप्तान के तौर पर अपनी टीम को जो मजबूती दी, वह आज भी एसोसिएट नेशंस के क्रिकेट में एक मिसाल मानी जाती है.
सिडनी में शेन वॉटसन का जलवा
ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर शेन वॉटसन (Shane Watson) हमेशा से ही बड़े मैचों के खिलाड़ी रहे हैं.31 जनवरी 2016 को भारत के खिलाफ सिडनी में उन्होंने एक कप्तानी पारी का बेहतरीन नमूना पेश किया. वॉटसन ने 71 गेंदों का सामना किया और नाबाद 124 रन बनाए. इस पारी में उन्होंने 10 चौके और 6 छक्के लगाए. हालांकि ऑस्ट्रेलिया यह मैच हार गया था, लेकिन वॉटसन की बल्लेबाजी ने भारतीय गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए थे. फिंच या रजा की तुलना में वॉटसन की पारी थोड़ी धीमी (स्ट्राइक रेट 174.64) जरूर थी, लेकिन एक मजबूत भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के सामने इस तरह की पारी खेलना उनकी तकनीकी श्रेष्ठता को दर्शाता है.
क्लास और पावर का मेल बाबर आजम
पाकिस्तान के पूर्व कप्तान बाबर आजम (Babar Azam) को अक्सर उनकी क्लासिक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है. लेकिन 14 अप्रैल 2021 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन में उन्होंने अपना ‘पावर अवतार’ दिखाया. बाबर ने 59 गेंदों में 122 रनों की शानदार पारी खेली. इस पारी की खूबसूरती यह थी कि उन्होंने महज 4 छक्के लगाए, लेकिन 15 चौकों के जरिए उन्होंने यह साबित किया कि बिना जोखिम उठाए भी 206.77 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए जा सकते हैं. दक्षिण अफ्रीका की तेज और उछाल वाली पिचों पर बाबर की यह पारी एक मास्टरक्लास थी, जो उन्हें दुनिया के बेहतरीन कप्तानों की फेहरिस्त में खड़ा करती है.
कौन किस पर भारी?
अगर इन पांचों महान पारियों की तुलना करें, तो एरॉन फिंच ‘क्वांटिटी’ यानी रनों की संख्या के मामले में निर्विवाद सबसे आगे हैं. वहीं, सिकंदर रजा ने ‘इम्पैक्ट’ और ‘स्पीड’ के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया है.उनका स्ट्राइक रेट और छक्कों की संख्या (15) अविश्वसनीय है. बाबर आजम और शेन वॉटसन की पारियां लंबी टिकने की क्षमता को दर्शाती हैं, जहां उन्होंने 60 से ज्यादा गेंदों का सामना किया. दूसरी ओर, शहरयार बट ने कम गेंदों में अधिक प्रभाव डालकर स्ट्राइक रेट और रनों के बीच एक बेहतरीन संतुलन बिठाया. ये पांचों पारियां केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह उस दबाव की कहानी हैं जिसे एक कप्तान ने अपनी छाती पर झेला और बल्ले से जवाब दिया. क्रिकेट के इस सबसे छोटे फॉर्मेट में, इन कप्तानों ने दिखाया कि जिम्मेदारी जब कंधों पर होती है, तो बल्ला और भी जोर से बोलता है.