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मध्य प्रदेश में खंडवा के प्याज किसान परेशान हैं. इस बार पछली बार की तुलना में प्याज की बंपर आवक हो गई है. प्याज को लंबे समय तक स्टोर करना भी आसान नहीं होता. जल्दी खराब होने के कारण किसानों के पास इसे रोककर रखने का विकल्प भी नहीं है. ऐसे में उन्हें मजबूरी में सस्ते दामों पर बेचना पड़ रहा है.
Khandwa News: मध्य प्रदेश में खंडवा के प्याज किसान फिर संकट में हैं. इस बार प्याज की पैदावार पिछले साल के मुकाबले करीब 25 से 30 प्रतिशत ज्यादा बताई जा रही है. लेकिन, हालात ऐसे हैं कि मंडियों में खरीदार ही नहीं मिल रहे. नतीजा किसान अपनी उपज औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं. वहीं, प्याज किसान लगातार सरकार से एमएसपी पर प्याज खरीद की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार के ध्यान नहीं देने के कारण किसान मजबूरी में प्याज बाहर व्यापारियों को सस्ते में बेचने को मजबूर हैं.
6-7 रुपये किलो में बिक रहा प्याज
खंडवा की मंडियों में इस समय प्याज के दाम बेहद गिर चुके हैं. किसानों को सिर्फ 6 से 7 रुपए प्रति किलो ही मिल रहे हैं, जबकि लागत इससे कहीं ज्यादा है. ऐसे में किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है. कभी ‘लाल सोना’ कहे जाने वाला प्याज अब किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गया है. खंडवा के किसान सुखदेव राठौड़ ने 6 एकड़ में प्याज लगाया था, लेकिन कम दामों ने उनकी पूरी मेहनत खराब कर दी. कई किसान तो अपनी फसल को मंडी में बेचने की बजाय जानवरों को खिलाने पर मजबूर हैं.
लागत ज्यादा, दाम बेहद कम
किसानों के अनुसार एक एकड़ प्याज की खेती में करीब 80 से 85 हजार रुपए तक खर्च आता है. वहीं मंडी में उन्हें 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल ही मिल रहे हैं. इस कीमत में मजदूरी, ट्रांसपोर्ट और खाद का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है. किसानों का कहना है कि इस बार प्याज का निर्यात (एक्सपोर्ट) भी प्रभावित हुआ है. विदेशी खरीदार नहीं आ रहे, जिससे बाजार में मांग और कम हो गई है. महाराष्ट्र के व्यापारी भी खरीदारी से दूरी बना रहे हैं.
मौसम और बीमारियों ने बढ़ाई परेशानी
इस बार मौसम ने भी किसानों का साथ नहीं दिया. मार्च के आखिर और अप्रैल की शुरुआत में हुई बारिश से फसल को नुकसान पहुंचा. साथ ही ‘थ्रिप्स’ और ‘पर्पल ब्लॉच’ जैसी बीमारियों ने भी उत्पादन को प्रभावित किया. किसानों का कहना है कि समय पर सही जानकारी और दवाइयां नहीं मिल पाईं. कृषि विभाग की ओर से जागरूकता कम रही, जिससे फसल को और ज्यादा नुकसान हुआ.
MSP की मांग, लेकिन नहीं मिल रहा सहारा
किसान लंबे समय से प्याज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग कर रहे हैं. लेकिन, अभी तक सरकार की ओर से खरीदी नहीं होने के कारण उन्हें खुले बाजार में कम दामों पर ही बेचना पड़ रहा है.
भंडारण की कमी, मजबूरी में बेच रहे फसल
प्याज को लंबे समय तक स्टोर करना आसान नहीं होता. जल्दी खराब होने के कारण किसानों के पास इसे रोककर रखने का विकल्प भी नहीं है. ऐसे में उन्हें मजबूरी में सस्ते दामों पर बेचना पड़ रहा है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें