लगातार तीन दिन मंडी बंद रहने के बाद सोमवार को हजारों की संख्या में किसान उपज बेचने नानाखेड़ी मंडी पहुंचे। हालात यह थे कि गेहूं की ट्रॉलियों को दशहरा मैदान और बीज निगम में खड़ा कराना पड़ा। वहीं उपज के सही भाव न मिलने पर किसानों ने चक्काजाम कर दिया। पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए बल प्रयोग किया। कुछ पुलिसकर्मियों ने किसानों को धक्का दिया और उनकी पीठ पर थप्पड़ मारे। बता दें कि लगातार छुट्टियों के कारण तीन दिन से मंडी बंद थी। वहीं सरकारी स्तर पर खरीदी अभी शुरू नहीं हुई है। आने वाले दिनों में शादी के मुहूर्त भी हैं। ऐसे में किसानों को पैसों की जरूरत पड़ रही है। इसी कारण वे मंडी में ही उपज बेचने पहुंच रहे हैं। रविवार को ही भर गया दशहरा मैदान पिछले वर्ष की तरह इस बार भी तय किया गया है कि गेहूं की बोली दशहरा मैदान में ही लगेगी। चना और धनिया की नीलामी नानाखेड़ी मंडी परिसर में होगी। शनिवार से ही किसान अपनी उपज लेकर पहुंचना शुरू हो गए थे। रविवार शाम को ही दशहरा मैदान भर गया था। लगभग 1500 ट्रॉलियां दशहरा मैदान में खड़ी हो गईं। इसके बाद ट्रॉलियों को बीज निगम की जमीन पर खड़ा कराया जाने लगा। वह इलाका भी ट्रॉलियों से भर गया। इसके बाद ट्रॉलियों को एसपी ऑफिस रोड पर खड़ा कराया गया। एसपी ऑफिस से अंबेडकर भवन चौराहे तक ट्रॉलियों की लाइन लग गई। किसानों ने किया चक्काजाम सोमवार सुबह व्यापारियों ने गेहूं की बोली लगाना शुरू की। इसी दौरान किसानों को लगा कि उपज कम दाम में खरीदी जा रही है। इसी से नाराज होकर किसानों ने नानाखेड़ी मंडी गेट पर चक्काजाम कर दिया। सूचना मिलने पर एसडीएम, तहसीलदार सहित पुलिस टीम मौके पर पहुंची और किसानों को समझाइश दी। पुलिसकर्मियों ने मारे थप्पड़ चक्काजाम कर रहे किसानों को हटाने के लिए पुलिसकर्मियों को बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने किसानों को हटाने के लिए धक्के मारे। इसके अलावा उनकी पीठ पर थप्पड़ भी मारे गए। दो किसानों को पकड़कर थाने भी भेज दिया गया। एसडीएम ने ली बैठक उपज कम दाम पर खरीदने की शिकायत पर एसडीएम शिवानी पांडे ने व्यापारियों और किसानों के प्रतिनिधिमंडल की पुलिस कंट्रोल रूम में बैठक ली। इसमें व्यापारियों ने बताया कि तीन दिन पहले जो गेहूं 3200 रुपए प्रति क्विंटल खरीदा गया था, उसकी क्वालिटी अच्छी थी। आज जो गेहूं 2500 रुपए प्रति क्विंटल खरीदा गया, उसकी क्वालिटी कमजोर थी, इसलिए कम दाम में खरीदा गया। एसडीएम ने वहीं उस गेहूं की बोली एक पर्ची पर गुप्त रूप से लगवाई। लगभग सभी व्यापारियों ने उस गेहूं की बोली 2500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से ही लगाई। इसके बाद किसान संतुष्ट हुए। पानी और छांव के लिए तरसे किसान बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने के कारण व्यवस्थाएं भी ठीक से नहीं चल पाईं। दशहरा मैदान में न तो किसानों को पीने के लिए पानी मिला और न ही धूप से बचने के लिए टेंट की व्यवस्था की गई थी। किसान इससे काफी नाराज दिखे। उनका कहना था कि एक टैंकर रखा गया है, उसका पानी भी जल्द ही गरम हो जाता है। प्रशासन को कम से कम मूलभूत व्यवस्थाएं तो करनी ही चाहिए।
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