पराली की टेंशन खत्म! ये मशीन जुर्माने से बचाएगी, मोटी कमाई कराएगी, 2 घंटे में एक एकड़ साफ

पराली की टेंशन खत्म! ये मशीन जुर्माने से बचाएगी, मोटी कमाई कराएगी, 2 घंटे में एक एकड़ साफ


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Agriculture Machine: सरकार द्वारा इस कृषि यंत्र की खरीद पर अनुदान भी दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक तकनीक को अपनाएं. इससे न केवल मजदूरों की कमी की समस्या दूर होगी, बल्कि खेती भी आसान और लाभकारी बनेगी.

Agri Tips: अभी तमाम जगहों पर गेहूं की कटाई हो रही है. कुछ किसान मशीन से गेहूं की कटाई करने के बाद खेतों में बचे पराली को आग लगा कर नष्ट कर देते हैं. इससे मिट्टी में रहने वाले केंचुए खत्म हो जाते हैं और खेत की उर्वरक क्षमता कम हो जाती है. इसको लेकर किसान काफी परेशान रहते हैं. किसान अगर पराली को नष्ट करने के लिए खेत में जला देता हैं तो उन पर एफआईआर दर्ज हो जाती है.

रीवा और शहडोल संभाग के संभागीय कृषि यंत्री सरद कुमार नार्नवेरे ने बताया कि पराली किसानों के लिए समस्या नहीं, बल्कि एक संसाधन है. यदि इसे सही तरीके से प्रबंधित किया जाए तो यह खेत की उर्वरता बढ़ाने में सहायक हो सकती है. उन्होंने कहा, किसान अक्सर अगली फसल की जल्दी के कारण पराली को खेत में मिलाने से बचते हैं, क्योंकि इससे फसल बोने में देरी हो जाती है. इसी वजह से वे पराली जलाने का विकल्प चुनते हैं, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है और कानूनन अपराध भी है.

स्ट्रॉ बेलर मशीन कमाल
कृषि विभाग अब किसानों को स्ट्रॉ बेलर मशीन उपलब्ध करा रहा है, जो पराली प्रबंधन का एक आधुनिक और प्रभावी समाधान है. यह मशीन खेत में बचे पुआल को इकट्ठा कर उसे गोल या चौकोर बंडलों में बदल देती है. इससे किसान पराली को आसानी से इकट्ठा कर सकते हैं और उसका उपयोग पशु चारे या अन्य कार्यों में कर सकते हैं.

1 दिन में कर देगी 15 दिन का काम
विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रॉ बेलर मशीन से जहां पहले 10 से 15 दिन का काम होता था, वह अब एक दिन में पूरा हो जाता है. यह मशीन एक घंटे में लगभग 2 एकड़ खेत की पराली को बंडल में बदल सकती है. एक बंडल का वजन करीब 16 से 20 किलो होता है. वहीं, 2 एकड़ खेत में पराली बंडल बनाने का खर्च लगभग 1,000 रुपये आता है, जो किसानों के लिए किफायती भी है.

सरकार दे रही अनुदान
सरकार द्वारा कृषि यंत्रों की खरीद पर अनुदान भी दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक तकनीक को अपनाएं. इससे न केवल मजदूरों की कमी की समस्या दूर होगी, बल्कि खेती भी आसान और लाभकारी बनेगी. कृषि विभाग का मानना है कि यदि किसान पराली जलाने के बजाय इस तरह की मशीनों का उपयोग करें, तो वायु प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है. साथ ही, किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और खेती के प्रति युवाओं का रुझान भी बढ़ेगा.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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