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Mango Farming Tips: मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है. बागों में बौर और टिकोरे टूटकर गिर गई हैं, जिससे उत्पादन पर करीब 50 प्रतिशत तक खतरा मंडरा रहा है. लगातार नमी बढ़ने से फंगल संक्रमण और कीटों का प्रकोप भी बढ़ गया है. ऐसे में नुकसान बचाने के लिए जानें एक्सपर्ट के कुछ उपााय…
Mango Farming: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का असर अब आम की फसल पर साफ नजर आने लगा है. मौसम में लगातार हो रहे बदलाव, बढ़ती नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण आम के पेड़ों पर लगे बौर और टिकोरे बड़े पैमाने पर झड़ गए हैं. इससे इस साल आम उत्पादन में करीब 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.
जानकारी के अनुसार, सीधी जिले के चुरहट और गोपद बनास क्षेत्र में रविवार रात और सोमवार सुबह तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई है. इस दौरान आम के पेड़ों पर लगे नाजुक बौर और मंजरी टूटकर जमीन पर गिर गए. आम के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान फूलों से फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है. ऐसे में फूलों का झड़ना सीधे तौर पर उत्पादन को प्रभावित करता है.
गोपद बनास क्षेत्र के कोचिटा गांव निवासी सुनील सोंधिया ने बताया कि चुरहट और गोपद बनास में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से आम की फसल को करीब 50% नुकसान हुआ है. इस समय पेड़ों में टिकोरी बन रही थी, लेकिन तेज बारिश और ओलों के कारण वे झड़ गईं, जिससे उत्पादन पर बड़ा असर पड़ा है.
बारिश के कारण रोग का खतरा बढ़ा
सीधी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने लोकल 18 को बताया कि इस समय आम के पेड़ों पर बौर से मंजरी बनने की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन अचानक बदले मौसम ने इस प्रक्रिया को बाधित कर दिया. तेज हवा और ओलों की मार से बड़ी संख्या में मंजरी टूट गई, जिससे फल बनने की संभावना कम हो गई है. इसके साथ ही बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ने से फंगल संक्रमण, कीट और रोगों का खतरा भी बढ़ गया है.
आम को होगा बड़ा नुकसान
डॉ. शैलेन्द्र गौतम का कहना है कि अप्रैल माह में इस तरह की बारिश और ओलावृष्टि आम की फसल के लिए बेहद नुकसानदायक होती है. लगातार नमी और कम धूप के कारण पेड़ों पर लगे फूल तेजी से झड़ते हैं और जो फल बन भी रहे हैं, उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. फल का आकार छोटा रह सकता है और उसमें मिठास भी कम हो सकती है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार मौसम के प्रभाव से आम की पैदावार में भारी कमी देखने को मिल सकती है. इसका असर बाजार में आम की उपलब्धता और कीमतों पर भी पड़ेगा. कम उत्पादन के कारण आम के दाम बढ़ने की संभावना है, जिससे उपभोक्ताओं को महंगा फल खरीदना पड़ सकता है.
इन उपायों से कम होगा नुकसान
डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने किसानों को नुकसान कम करने के लिए कुछ उपाय भी बताए हैं. किसानों को सलाह दी कि वे बागों की नियमित निगरानी करें और फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करें. बोडो मिक्सचर या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का उपयोग फंगल संक्रमण को रोकने में मददगार हो सकता है. इसके अलावा, छोटे फलों के झड़ने की समस्या को कम करने के लिए नैप्थालिन एसीटिक एसिड (NAA) का 4 से 10 पीपीएम घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है. इन उपायों को अपनाकर किसान कुछ हद तक फसल को बचा सकते हैं, लेकिन मौसम की मार ने इस साल आम उत्पादन पर बड़ा असर डाल दिया है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें