Jabalpur News: सरकारें दावे करती हैं कि गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी योजनाओं की अपनी ही रसोई अब धुएं और आंसुओं में डूबी है. दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना, जो गरीबों का पेट भरने के लिए शुरू की गई थी, आज खुद ‘सिस्टम की बेरुखी’ का शिकार है.
जबलपुर के गोकुलदास धर्मशाला स्थित दीनदयाल अंत्योदय रसोई के हालात जानने लोकल 18 की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची. तब नजारा सरकारी दावों के बिल्कुल उल्टा था. जहां गैस सिलेंडर की कमी के चलते महिलाएं पाइप से फूंक मारकर लकड़ियां जलाए जा रही थीं और लोगों को सिर्फ दाल-चावल परोसा जा रहा था, जबकि थाली से रोटी गायब थी.
चेहरे पर पसीना, आंखों में आंसू…
तस्वीरें गोकुलदास धर्मशाला स्थित अंत्योदय रसोई की हैं. यहां काम करने वाली महिला सुमन के चेहरे पर पसीना है और आंखों में धुएं की वजह से आंसू. वह कोई आम महिला नहीं, बल्कि वो योद्धा है जो पिछले एक महीने से इसी जद्दोजहद के बीच रोजाना 400 से 500 लोगों का खाना तैयार कर रही है. पर, विडंबना देखिए, जिस चूल्हे को आधुनिक होना चाहिए था. वह आज 50 साल पीछे लकड़ियों पर लौट आया है. गैस सिलेंडर की किल्लत ने पूरी व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है. रोटियां बनाना अब लगभग बंद हो गया है, क्योंकि चूल्हे पर 500 लोगों के लिए रोटियां सेंकना मुमकिन नहीं है.
स्टाफ को धुएं से हो रही एलर्जी
उन्होंने बताया जो काम गैस पर आधे घंटे में होता था, अब चूल्हे पर उसे करने में 2 से 3 घंटे लग रहे हैं. धुएं के कारण रसोई के स्टाफ को सांस लेने में तकलीफ और एलर्जी जैसी समस्याएं हो रही हैं. पहले 20-25 किलो आटे की रोटियां आसानी से बन जाती थीं. अब चूल्हे पर लकड़ियां जलती नहीं, ऊपर से वे गीली हैं. सुबह 6 बजे आकर भी हम खाना समय पर नहीं दे पा रहे. मजबूरी में सिर्फ दाल, चावल और सब्जी ही बना पा रहे हैं.
मैनेजर बोले- सब कुछ ‘मैनेज’ कर रहे हैं
रसोई के मैनेजर राहुल शुक्ला ने बताया, गैस की कमी के कारण काम 1 घंटा पहले शुरू करना पड़ रहा हैं. स्टाफ बीमार पड़ रहा है, लेकिन कोशिश यही है कि कोई भूखा न जाए. हालांकि, चूल्हे में 400-500 लोगों के लिए रोटियां बनाना लगभग असंभव है.
कमिश्नर बोले; गैस कम इस्तेमाल करने को कहा है…
दूसरी तरफ नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार का दावा कुछ और ही है. उनका कहना है गैस की कोई कमी नहीं है. हमने लोगों को जागरूक किया है कि गैस का ‘कम उपयोग’ करें. रोटी की कोई कमी नहीं है, सब सुचारू रूप से चल रहा है. बहरहाल प्रशासन कह रहा कि स्टॉक पर्याप्त है, तो फिर सुमन को पाइप से फूंक मारकर चूल्हा क्यों जलाना पड़ रहा है? अगर सब कुछ ठीक है, तो गरीबों की थाली से रोटियां क्यों गायब हो गईं? अब देखना होगा दीनदयाल अंत्योदय रसोई की व्यवस्था आखिर कब तक पटरी पर लौटती है.