बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र की करीब 600 महिलाएं मंगलवार को अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। स्व-सहायता समूह से जुड़ी इन महिलाओं ने सरकार से स्वरोजगार उपलब्ध कराने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की। महिलाओं का आरोप है कि समूह बनाने के बावजूद उनके पास काम का कोई जरिया नहीं है। समूह से पिछले 15 सालों से जुड़ी मंदा नंदनवार ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों के समूह अब टूटने की कगार पर हैं। सरकार बैंकों से लोन तो दिलवा देती है, लेकिन उस पैसे का इस्तेमाल किस व्यवसाय में करना है, इसका कोई मार्गदर्शन नहीं मिलता। नतीजा यह है कि महिलाएं स्वरोजगार शुरू नहीं कर पातीं और कर्ज के बोझ तले दब रही हैं। सिर्फ आश्वासनों तक सीमित रहा रोजगार समूह की अध्यक्ष मंजू भालाधरे ने बताया कि समूह बनाते समय उन्हें बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे और रोजगार दिलाने का भरोसा दिया गया था। लेकिन 3-4 साल गुजर जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है। नगर परिषद की ओर से भी उन्हें कोई ट्रेनिंग या मार्गदर्शन नहीं मिला है। आत्मनिर्भर बनने की मांग महिलाओं ने कलेक्टर से मांग की है कि उन्हें शासन की योजनाओं से सीधे जोड़ा जाए और काम के अवसर दिए जाएं। उनका कहना है कि वे आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं, लेकिन मार्गदर्शन और काम के अभाव में वे आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हो रही हैं। अब महिलाओं की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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