Vermicompost Making Tips: मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के आनंदपुर खेगांव के किसान मुकेश लाहौरिया ने कुछ अलग करने की ठानी और आज वही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई. उन्होंने YouTube से केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) बनाना सीखा और धीरे-धीरे इसे अपनी खेती में लागू किया. अब यही तरीका उनकी सफलता की कहानी लिख रहा है.
देसी केंचुओं से बना रहे जैविक खाद
मुकेश की खास बात ये है कि उन्होंने बाहर से केंचुए खरीदने के बजाय खेत और आसपास की जमीन से ही देसी केंचुए इकट्ठा किए. बिना ज्यादा खर्च किए उन्होंने पूरी तरह ऑर्गेनिक खाद तैयार करना शुरू कर दिया, जिससे उनकी लागत काफी कम हो गई.
महंगे खाद से मिली छुटकारा
पहले खेती में रासायनिक खाद और दवाइयों पर काफी पैसा खर्च होता था. लेकिन अब मुकेश को बाजार से कुछ खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती घर पर बनी केंचुआ खाद ही उनकी खेती को संभाल रही है.
छोटे प्रयोग से बड़ी सफलता
शुरुआत उन्होंने छोटे स्तर पर की थी, लेकिन जब फायदा दिखा तो इसे बढ़ा दिया.
आज उनके पास 12 से ज्यादा वर्मी कम्पोस्ट बेड हैं, जहां लगातार खाद तैयार हो रही है.
उत्पादन बढ़ा, मिट्टी भी हुई मजबूत
इस खाद के इस्तेमाल से उनकी जमीन की उर्वरता बढ़ी है और फसलों का उत्पादन भी बेहतर हुआ है. अब खेती पहले से ज्यादा मुनाफे वाली बन गई है.
कम मात्रा में ज्यादा असर
मुकेश बताते हैं कि एक एकड़ में 15-20 बोरी केंचुआ खाद ही काफी होती है, जो करीब 3 ट्रॉली गोबर खाद के बराबर काम करती है. यानी कम खर्च में ज्यादा फायदा.
हर फसल में मिल रहा फायदा
वे गेहूं, चना, मक्का, प्याज और सब्जियों में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. हर फसल में अच्छे रिजल्ट मिलने से उनका भरोसा और बढ़ गया है. केंचुआ खाद बनाना भी आसान है. गोबर को ठंडा करके बेड में डालते हैं, उसमें केंचुए डालते हैं और नमी बनाए रखते हैं. करीब 50-60 दिन में बढ़िया खाद तैयार हो जाती है.
अब दूसरे किसान भी सीख रहे तरीका
मुकेश की सफलता देखकर आसपास के किसान भी उनसे सीखने आ रहे हैं. अब वे इस खाद को बेचने की योजना भी बना रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी और बढ़ेगी. मुकेश कहते हैं कि अगर लागत कम नहीं करेंगे, तो मुनाफा नहीं होगा. इसलिए जैविक खेती और खुद खाद बनाना ही भविष्य है.