Khandwa News: खेती करने के साथ कोई किसान अपनी ही फसल से कैसे बिजनेसमैन बन सकता है, खंडवा के किसान से ये हुनर सीख सकते हैं. आज के समय में जब ज्यादातर किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग कर अधिक उपज के लिए परेशान हैं. वहीं, खंडवा के अहमदपुर खेगांव गांव के किसान ललित शंकर पाटिल ने अलग राह चुनी. उन्होंने खेती को सिर्फ मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि ‘धरती मां’ की सेवा माना. जैविक खेती को अपनाया और उपजी फसल से खुद की कंपनी खड़ी कर दी.
जैविक खेती से उगाई हल्दी, फिर बनाय ब्रांड
ललित शंकर पाटिल ने जैविक तरीके से हल्दी की खेती शुरू की. लेकिन उन्होंने सिर्फ उत्पादन तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी हल्दी को प्रोसेस कर पैकिंग के साथ खुद का ब्रांड तैयार किया. आज उनकी हल्दी कई शहरों में पहुंच रही है और लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है. उनकी हल्दी को ऑनलाइन मार्केटिंग से खूब फायदा मिल रहा है.
100 परसेंट शुद्धता की गारंटी
किसान ललित हल्दी पूरी तरह वैदिक और जैविक पद्धति से उगाते हैं. खेती में गोबर खाद, गोमूत्र, जीवामृत और पंचगव्य का उपयोग किया जाता है.इसमें किसी भी प्रकार का केमिकल, फंगीसाइड या रासायनिक दवा इस्तेमाल नहीं होती. ललित शंकर की सबसे बड़ी खासियत ये कि वह पूरी प्रक्रिया खुद करते हैं. हल्दी की खेती से लेकर उबालना, सुखाना, पॉलिशिंग, पीसना और पैकिंग सभी काम अपने स्तर पर करते हैं. इससे वे अपने उत्पाद की शुद्धता की पूरी गारंटी देते हैं.
मार्केट में मिलने वाली ब्रांडेड हल्दी से सस्ती
बाजार में जहां ब्रांडेड हल्दी 300 से 350 रुपए किलो तक बिकती है, वहीं ललित अपनी जैविक हल्दी करीब 250 रुपए किलो में बेचते हैं. कम कीमत में बेहतर गुणवत्ता मिलने से उनकी हल्दी की मांग लगातार बढ़ रही है. ललित का दावा है कि उनकी हल्दी में करीब 5% तक करक्यूमिन पाया जाता है, जबकि बाजार की हल्दी में यह मात्रा 1 से 1.5% तक ही होती है. यही कारण है कि उनकी हल्दी ज्यादा औषधीय और फायदेमंद मानी जा रही है.
‘पसंद नहीं तो पैसे वापस’
अपने प्रोडक्ट पर भरोसा दिखाते हुए ललित ग्राहकों को खास ऑफर भी देते हैं. अगर किसी को हल्दी पसंद नहीं आती, तो वह खुला पैकेट भी वापस कर सकते हैं और पूरा पैसा वापस मिल जाता है. इससे ग्राहकों का विश्वास और भी बढ़ रहा है.
सोशल मीडिया से बढ़ रहा कारोबार
भोपाल, इंदौर, देवास, उज्जैन, खरगोन, बुरहानपुर सहित कई शहरों में उनकी हल्दी पहुंच रही है. सोशल मीडिया के जरिए उन्हें ऑर्डर मिल रहे हैं और वे देशभर में सप्लाई कर रहे हैं. आने वाले समय में वे इसे और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं. ललित ने अपनी कंपनी ‘नमो ऑर्गेनिक फार्म’ के नाम से ब्रांड तैयार किया है. उन्हें एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस भी मिल चुका है, जिससे उनका प्रोडक्ट अब आधिकारिक रूप से बाजार में उपलब्ध है.
पीएम मोदी से प्रेरणा लेकर शुरू किया काम
ललित बताते हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वैल्यू एडिशन’ के विचार से प्रेरणा ली. उन्होंने सोचा कि सिर्फ फसल बेचने के बजाय उसका प्रोसेसिंग कर ब्रांड बनाना ज्यादा फायदेमंद होगा, और इसी दिशा में काम शुरू किया. ललित अन्य किसानों को भी जैविक खेती अपनाने की सलाह देते हैं. कहा, किसान को ‘अन्नदाता’ बनना चाहिए, ‘जहरदाता’ नहीं. रासायनिक खेती से जमीन की सेहत खराब होती है, जबकि जैविक खेती से लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है. ललित शंकर पाटिल से 8889669400 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं.