ग्वालियर23 मिनट पहले
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ग्वालियर हाईकोर्ट का फाइल फोटो
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शहर की पहाड़ियों पर बढ़ते अवैध कब्जों और मुरम खनन को लेकर सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की बेंच ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला केवल कानूनी या प्रशासनिक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व से जुड़ा हुआ है।
कोर्ट ने साफ चेतावनी दी कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ग्वालियर की पहाड़ियां पूरी तरह समाप्त हो सकती हैं, जिससे शहर को गंभीर पर्यावरणीय नुकसान होगा।
अदालत ने यह भी कहा कि राजनीतिक संरक्षण, प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की निष्क्रियता के कारण लैंड माफिया बेखौफ होकर पहाड़ियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। खासतौर पर गुड़ा-गुड़ी का नाका और आसपास के क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताए गए हैं।
कोर्ट ने इन पहाड़ियों को ‘सिटी फॉरेस्ट’ के रूप में विकसित करने का सुझाव भी दिया है। इस योजना के तहत, इन स्थानों को मॉर्निंग वॉक, योग और पारिवारिक पिकनिक के लिए तैयार किया जाएगा। इससे न केवल शहर का पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि ग्वालियर में हर साल बढ़ती भीषण गर्मी से भी राहत मिल सकेगी। अदालत ने इस मॉडल को अन्य जिलों के लिए भी एक नजीर बनाने पर जोर दिया है।
चार बिंदुओं पर 23 अप्रेल को मांगी रिपोर्ट
हाई लेवल कमेटी का विधिवत गठन और सभी सदस्यों की सहमति।
कमेटी की पहली बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का ब्यौरा। पहाड़ियों के सर्वे और फेंसिंग के लिए तैयार की गई प्रारंभिक कार्ययोजना।
सिटी फॉरेस्ट प्रोजेक्ट को लेकर धरातल पर शुरू की गई कार्रवाई।
कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी अधिकारी और अधिवक्ताओं की हाई-लेवल कमेटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस कमेटी में नगर निगम, पुलिस, वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति. आयुर्वेद विशेषज्ञ और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को शामिल किया गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहाड़ियों को माफिया से मुक्त कराकर वहां फेंसिंग की जाए और बड़े पैमाने पर औषधीय व फलदार पौधे लगाए जाएं।
हाई-पावर कमेटी में ये रहेंगे
1- अध्यक्षः जिला कलेक्टर, ग्वालियर
2- समन्वयक/सचिवः विवेक खेडकर (एडिशनल एडवोकेट जनरल)
3- सदस्यः पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, डीएफओ, कुलपति (कृषि विवि)
4- विशेषज्ञः गौरिशंकर दुबे (पूर्व प्रिंसिपल रजिस्ट्रार), डॉ. धर्मेन्द्र रिछारिया (आयुर्वेद), डॉ. आशुतोष गुप्ता (सीनियर वेटरनरी सर्जन), प्रशांत शर्मा (अधिवक्ता)
