ताजे ‘बिस्कुट’ की तरह टूट रही सड़क, बारिश तो क्या? इंसानी हाथों का दबाव भी नहीं झेल पा रही

ताजे ‘बिस्कुट’ की तरह टूट रही सड़क, बारिश तो क्या? इंसानी हाथों का दबाव भी नहीं झेल पा रही


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प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत आदिवासियों के विकास के लिए करोड़ों का बजट जारी होता है. लेकिन मंडला के लावर माल में 1 करोड़ 59 लाख की लागत से बन रही सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है. लावर माल की सड़क इस बात का सबूत है कि यहां निगरानी करने वाले इंजीनियरों की आंखों पर शायद ठेकेदार ने ‘डामर’ का चश्मा चढ़ा दिया है.

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Mandla News: मध्य प्रदेश के मंडला जिले में विकास के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जनमन योजना’ के तहत बनाई जा रही करोड़ों की सड़क पहली बारिश तो क्या, इंसानी हाथों का दबाव भी नहीं झेल पा रही है. यहां 1.60 करोड़ की सड़क किसी मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह नहीं. बल्कि ताजे ‘बिस्कुट’ की तरह टूट रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है और गुणवत्ता के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है.

मंडला के पोड़ी बकोरी से लावर माल तक बनी पक्की सड़क, जिसकी कीमत सरकार ने 1.60 करोड़ रुपये तय की है. ठेकेदार ने सड़क ऐसी बनाई है कि ग्रामीण बिना किसी औजार के, सिर्फ उंगलियों के जोर से पूरी की पूरी सड़क उखाड़कर हाथ में भर ले रहे हैं. यह सड़क पीएम जनमन योजना का हिस्सा है. 2.44 किलोमीटर लंबी इस सड़क की लागत 159.46 लाख रुपये (करीब 1.60 करोड़) है.

सड़क के डामर की परत है काफी कमजोर
बोर्ड पर काम की गुणवत्ता और समय सीमा के बड़े-बड़े दावे लिखे हैं. लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. सड़क पर बिछाई गई डामर की परत इतनी कमजोर है कि उसे किसी मशीन की जरूरत नहीं. बल्कि लोग अपने हाथों से ही उखाड़ दे रहे हैं. विजुअल्स में साफ देखा जा सकता है कि सड़क की गिट्टियां और डामर मिट्टी की तरह बिखर रहे हैं. सड़क के किनारों की फिनिशिंग गायब है.

ग्रामीणों को सड़क ज्यादा दिन ना चलने की चिंता
डामरीकरण के नाम पर केवल काले रंग का लेप लगाया गया महसूस होता है. हालांकि अभी इस निर्माणाधीन सड़क पर पुलिया का काम चल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि कई दशकों के बाद एक तो सड़क बन रही है. ऊपर से यह ऐसी सड़क बन रही है कि ज्यादा दिन नहीं टिक पाएगी और विडंबना देखिए, सूचना बोर्ड पर ‘गुणवत्ता’ की बातें लिखी हैं और बोर्ड के ठीक नीचे भ्रष्टाचार हो रहा है. आदिवासी बहुल इलाके में विकास के नाम पर यह मजाक सीधे तौर पर जनता की जेब पर डाका है.



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