परीक्षा लेनी है तो अफसरों की लें! हजारों शिक्षक सड़क पर उतरे, शिक्षामंत्री का बड़ा बयान

परीक्षा लेनी है तो अफसरों की लें! हजारों शिक्षक सड़क पर उतरे, शिक्षामंत्री का बड़ा बयान


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Balaghat News: शिक्षकों का कहना है कि सिर्फ हम ही क्यों? हमेशा हम पर ही प्रयोग क्यों किए जाते हैं? हम ही क्यों ई-अटेंडेंस लगाएं? हमारी ही क्यों परीक्षा हो? बाकी तमाम अफसर और कर्मचारी क्यों नहीं दिखते हैं? हमारे पढ़ाए बच्चे आज तमाम सरकारी नौकरी में हैं. ऐसे में सरकार को हमारी मांगें माननी चाहिए.

Balaghat News: बालाघाट में बुधवार को जिले भर से हजारों शिक्षक मुख्यालय पहुंचे. मुलना स्टेडियम में एक सभा की. उसके बाद लंबी रैली निकालकर कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया. यहां पर डिप्टी कलेक्टर प्रदीप कौरव को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा. मांग की कि शिक्षकों की जो योग्यता परीक्षा होनी है, उसे रद्द किया जाए. शिक्षकों का कहना है कि यह उनकी गरिमा के साथ खिलवाड़ है. अगर परीक्षा लेनी है, तो सभी सरकारी कर्मचारी की लो, सिर्फ शिक्षकों के साथ ही प्रयोग क्यों. सड़कों पर उतरे शिक्षक काफी आक्रोशित लग रहे थे.

सरकार इसलिए ले रही परीक्षा
मध्य प्रदेश में अब लोक शिक्षण संचालयनालय ने बीते महीने एक से नोटिफिकेशन जारी हुआ. इसके मुताबिक, प्राइमरी और मिडिल स्कूल में पढ़ाने वाले पूरे प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है. स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के मुताबिक, जिन टीचर्स की नौकरी शिक्षा का अधिकार अधिनियम यानी RTE के लागू होने यानी साल 2009 से पहले हुई थी, उन्हें नौकरी जारी रखने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा देनी पड़ेगी.

बालाघाट में हजारों शिक्षक जमा
सरकार ने जब से टीईटी का नोटिफिकेशन जारी किया है, उसके बाद से शिक्षकों में खलबली सी मच गई है. वे शुरू से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. शिक्षकों का कहना है कि सिर्फ हम ही क्यों? हमेशा हम पर ही प्रयोग क्यों किए जाते हैं? हम ही क्यों ई-अटेंडेंस लगाएं? हमारी ही क्यों परीक्षा हो? बाकी तमाम अफसर और कर्मचारी क्यों नहीं दिखते हैं? हमारे पढ़ाए बच्चे आज तमाम सरकारी नौकरी में हैं. ऐसे में सरकार को हमारी मांगें माननी चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता तो आने वाले समय में राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन होगा.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से खलबली
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश आधार बनाया है. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले चुने गए शिक्षकों को दो साल के भीतर परीक्षा देनी होगी. इसमें उन शिक्षकों को शामिल किया गया है, जिनके रिटायरमेंट को 5 साल से ज्यादा का समय बचा है. अगर इस परीक्षा को वह टीचर पास नहीं कर पाते हैं तो उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ सकती है. सिर्फ मध्य प्रदेश में ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में भी ऐसी ही तैयारी है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इस तरह की परीक्षा से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा. लेकिन, अब शिक्षक इसे स्वाभिमान से खिलवाड़ मान रहे हैं.

शिक्षा मंत्री बोले- हम आदेश का पालन कर रहे
बालाघाट के प्रभारी मंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री बालाघाट दौरे पर थे. इस दौरान शिक्षा मंत्री ने बताया, सरकार ने केवल सर्वोच्च न्यायालय के पुराने निर्देशों का पालन किया था, लेकिन अब सरकार वापस अपना पक्ष रखेगी. उन्होंने कहा कि शिक्षक संगठन इस विषय में निचले स्तर तक कर्मचारियों के बीच फैले संदेह को दूर करें. सरकार का तर्क है कि टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षक तय भर्ती नियमों का पालन कर सेवा में आए थे. वहीं, शिक्षकों ने उनके बयान पर कहा कि यह बात हमें लिखित में दें.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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