हरदा में 9.78 करोड़ से नया बस स्टैंड बनेगा: 126 दुकानें, ऑफिस और आधुनिक सुविधाएं होंगी; कांग्रेस ने भूमिपूजन का विरोध किया – Harda News

हरदा में 9.78 करोड़ से नया बस स्टैंड बनेगा:  126 दुकानें, ऑफिस और आधुनिक सुविधाएं होंगी; कांग्रेस ने भूमिपूजन का विरोध किया – Harda News




हरदा में नेताजी सुभाषचंद्र बोस बस स्टैंड के नवीनीकरण का भूमिपूजन बुधवार शाम को किया गया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री कमल पटेल, नगर पालिका अध्यक्ष भारती कमेडिया और उपाध्यक्ष अंशुल गोयल उपस्थित रहे। लगभग 9 करोड़ 78 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस नए बस स्टैंड भवन का निर्माण कार्य एक साल में पूरा करने का लक्ष्य है। नगर पालिका अध्यक्ष भारती कमेडिया ने बताया कि नई बस स्टैंड बिल्डिंग तीन मंजिला होगी। इसमें कुल 126 दुकानें बनाई जाएंगी। ग्राउंड फ्लोर पर 26 दुकानें, मेजेनाइन पर 27, फर्स्ट फ्लोर पर 61 और सेकंड फ्लोर पर 1500 से 3000 वर्ग फीट की 6 दुकानें और ऑफिस स्पेस शामिल होंगे। यह नया बस स्टैंड यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित होगा। इसमें शेड्यूल डिस्प्ले, वेटिंग एरिया, टिकट काउंटर और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे पहले, शहर के वार्ड 32 स्थित सुदामा नगर में नल जल योजना के तहत 50 से अधिक कॉलोनियों में नर्मदा जल पहुंचाने के लिए भी भूमिपूजन किया गया। पूर्व मंत्री कमल पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि यह सर्वसुविधायुक्त बस स्टैंड महानगरों की तर्ज पर बनाया जा रहा है। इसमें यात्रियों, बस चालकों के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने हेतु दुकानें भी शामिल होंगी। यात्रियों के लिए भोजन और ठहरने सहित अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। दो तस्वीरों में देखिए भूमिपूजन कार्यक्रम
पार्षदों ने कलेक्टर को शिकायत की दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष अमर रोचलानी ने कांग्रेस पार्षदों के साथ कलेक्टर को शिकायत सौंपी है। उन्होंने इस पूरे मामले को “जनता के पैसे पर राजनीतिक डाका” करार दिया। अमर रोचलानी ने आरोप लगाया कि बस स्टैंड का निर्माण जनता के कर के पैसे से हो रहा है, लेकिन इसे भाजपा के निजी कार्यक्रम के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन और जनता के अधिकारों की खुली लूट बताया। उनके अनुसार, शासकीय कार्यक्रम होने के बावजूद निमंत्रण पत्र से मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) और क्षेत्रीय विधायक का नाम जानबूझकर हटाया गया, ताकि नियमों को दरकिनार कर पूरा श्रेय एक ही राजनीतिक दल को मिल सके।



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