पहाड़ी इलाकों में धान की खेती होगी आसान, वैज्ञानिकों ने तैयार की 1 लाख की मशीन

पहाड़ी इलाकों में धान की खेती होगी आसान, वैज्ञानिकों ने तैयार की 1 लाख की मशीन


होमताजा खबरकृषि

पहाड़ी इलाकों में धान की खेती होगी आसान, वैज्ञानिकों ने तैयार की 1 लाख की मशीन

Last Updated:

Paddy Sowing Machine: एग्रीकल्चर कॉलेज के शुभंकर नामदेव ने दावा किया कि यह मशीन विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों के लिए डिजाइन की गई है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये कि यह मशीन यूरिया मतलब फर्टिलाइजर और धान की सीडलिंग्स दोनों का काम एक साथ करती है.

Agriculture News: पहाड़ी क्षेत्रों में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है. अक्सर ढलान और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मैदानी इलाकों वाली मशीनें पहाड़ों पर फेल हो जाती हैं, जिससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों बढ़ जाती है. इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए जबलपुर के एग्रीकल्चर कॉलेज के ‘फार्म मशीन डिपार्टमेंट’ ने एक विशेष मशीन तैयार की है.

एग्रीकल्चर कॉलेज के शुभंकर नामदेव ने दावा किया कि यह मशीन विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों के लिए डिजाइन की गई है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये कि यह मशीन यूरिया मतलब फर्टिलाइजर और धान की सीडलिंग्स दोनों का काम एक साथ करती है. यह मशीन खाद को मिट्टी की गहराई में डालती है, जिससे खाद बर्बाद नहीं होती और पौधों को पूरा पोषण मिलता है.

मशीन 80% फील्ड कैपेसिटी के साथ करती हैं काम
उन्होंने बताया कि इस मशीन से सटीक बुवाई होती है. इसमें लगे यूनिट्स के जरिए धान के पौधों को एक निश्चित और समान दूरी पर रोपा जा सकता है. पहाड़ी इलाकों में जहां काम की रफ्तार धीमी होती है, वहां यह मशीन 80% फील्ड कैपेसिटी के साथ काम करती है. यह मशीन एक घंटे में लगभग 2.5 से 4 हेक्टेयर क्षेत्र में खाद डालने और बुवाई का काम पूरा कर सकती है.

1500 रुपये प्रति घंटा खर्च
शुभांकर ने आगे बताया, करीब 1 लाख रुपये की कीमत वाली यह मशीन पेट्रोल से चलती है. इसमें 2 से 3 HP का इंजन लगा है. मेंटेनेंस और पेट्रोल मिलाकर इसका खर्च लगभग 1500 रुपये प्रति घंटा तक आता है, जो पारंपरिक मजदूरी के मुकाबले काफी किफायती है. इस तकनीक को कृषि कॉलेज के पीएचडी स्कॉलर ‘गुरू सर’ ने डेवलप किया है. बहरहाल, मशीन के आने से न सिर्फ किसानों का समय बचेगा, बल्कि धान की पैदावार में भी सुधार होगा. क्योंकि यह तकनीक ‘प्रिसिजन फार्मिंग’ पर आधारित है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से बुवाई हो सकेगी.

About the Author

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



Source link