बैतूल उपभोक्ता आयोग ने गुरुवार को किसानों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने बैंकों को फसल बीमा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह मामला किसानों के पटवारी हल्का बदलने से संबंधित है, जिसके कारण उन्हें वास्तविक नुकसान के बावजूद पूरी बीमा राशि नहीं मिल पाई थी। भारतीय स्टेट बैंक मुलताई और जिला सहकारी बैंक भैंसदेही पर आरोप था कि उन्होंने किसानों की कृषि भूमि के पटवारी हल्के को गलत तरीके से बदल दिया। इस त्रुटि के कारण मुलताई तहसील के ग्राम सांदिया निवासी किसान युवराज पिता प्यारे लाल रघुवंशी और भैंसदेही तहसील के ग्राम बोरगांव डैम निवासी किसान लालूसम पिता देवराव नांवों को फसल बीमा का पूरा लाभ नहीं मिल सका। किसानों का नुकसान कम दर्शाया गया था
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय और सदस्य चन्द्रशेखर माकोड़े ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने पाया कि हल्का परिवर्तन के कारण किसानों का नुकसान कम दर्शाया गया, जिससे उनकी बीमा राशि में कटौती हुई। आयोग ने इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए बैंकों को शेष बीमा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया। एडवोकेट दिनेश यादव ने बताया कि सांदिया गांव के किसान की भूमि पर 75.15 प्रतिशत नुकसान दर्ज था, लेकिन हल्का बदलने के कारण इसे केवल 48.14 प्रतिशत माना गया। किसान को 1 लाख 58 हजार 961 रुपए मिलने थे, जबकि उसे केवल 1 लाख 1 हजार 846 रुपए दिए गए। आयोग के आदेश के बाद अब उसे शेष 57,125 रुपए के साथ 10 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति और 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान किया जाएगा। ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में माना
इसी प्रकार, भैंसदेही क्षेत्र के बोरगांव डैम के किसान को भी बीमा राशि नहीं मिली थी। आयोग ने बैंक को उसे 59 हजार रुपए 6 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसानों के साथ इस तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। आयोग ने यह भी कहा कि गलत हल्का दर्ज कर बीमा भुगतान में कमी करना ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है। इस फैसले से जिले के अन्य प्रभावित किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके साथ इसी तरह की समस्या हुई होगी।
Source link