MP बोर्ड रिजल्ट डेट करीब! कम नंबर आए तो क्या करें, बच्चों और पेरेंट्स के लिए बड़ी सलाह

MP बोर्ड रिजल्ट डेट करीब! कम नंबर आए तो क्या करें, बच्चों और पेरेंट्स के लिए बड़ी सलाह


सागर. मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल की ओर से अगले हफ्ते के बाद कभी भी बोर्ड परीक्षा परिणाम जारी कर सकता है.  प्रदेश के सभी जिलों का मूल्यांकन पूरा हो चुका है. रिजल्ट को लेकर बच्चे तो उत्साहित होते ही हैं लेकिन शिक्षक, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को भी इसका इंतजार हैं. हालांकि रिजल्ट बिगड़ने की वजह से एक तरफ जहां बच्चे तनाव में आ जाते हैं तो दूसरी तरफ उनके माता-पिता भी गुस्सा करते हैं जो कभी-कभी घातक बन जाता है.

ऐसे में बच्चों और अभिभावकों को यह समझना चाहिए कि यह केवल परीक्षा का परिणाम है, पूरी जिंदगी की कहानी नहीं, ऐसे में परीक्षा परिणाम आने से पहले बच्चों और अभिभावकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जानते हैं…

1. रिजल्ट आने के बाद छात्रों के मन में राहत, घबराहट और अनिश्चितता जैसे कई भाव एक साथ आते हैं. ऐसे में भावनात्मक मजबूती बहुत जरूरी होती है, ताकि बच्चा इस दौर को संभाल सके. रिजल्ट के बाद सबसे जरूरी है अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें स्वीकार करना.

2. अगर नंबर उम्मीद के मुताबिक नहीं आए, तो खुद को दोष देने या दबाव में आने के बजाय थोड़ा समय दें. यह भी याद रखें कि मार्क्स आपकी काबिलियत की पूरी पहचान नहीं होते. आपकी मेहनत, आपकी सोच और सीखने की इच्छा ज्यादा मायने रखती है.

15 अप्रैल के आसपास आ सकता रिजल्ट
सागर के जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने कहा कि सागर जिले का मूल्यांकन 30 तारीख को पूरा हो गया था और मुझे लगता है कि 15 अप्रैल के आसपास रिजल्ट आ जाना चाहिए. मेरा अभिभावकों से अनुरोध है  कि बोर्ड बच्चों को किसी भी स्थिति में फेल नहीं कर रहा है, चाहे तीन विषय हो पांच विषय में फेल हो. उनको तुरंत मौका दिया जा रहा है. अगले महीने उनकी परीक्षा होगी और इसका टाइम टेबल भी जारी हो गया है. घबराने की कोई जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि साल भी बर्बाद नहीं होगी और जल्दी रिजल्ट भी आ जाएगा, ताकि जुलाई से वह भी पढ़ाई कर सकें, वहीं बच्चों के गार्जियन से कहना चाहूंगा कि अगर वह असफल होते हैं नंबर कम आते हैं तो ऐसे बच्चों को मोटिवेट करना चाहिए. वह चाहे तो अपने नंबर भी इंप्रूवमेंट कर सकते हैं. दोबारा परीक्षा देकर इससे कोई घटना नहीं घट पाएगी,

असफलता भी जीवन की दशा बदल देती
उन्होंने आगे कहा कि मेरे हिसाब से यह होना चाहिए कि अगर बच्चा असफल होता है तो उन्हें इस तरह से बताना चाहिए कि लाइफ में कुछ चीज कभी-कभी होती हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि एक बार वह फेल हो गया. मैंने देखा है कि जो बच्चे असफल होते हैं उनमें से कई बच्चे ऐसे होते हैं जो टॉप करते हैं और कई उदाहरण भी मेरे सामने हैं जो पहले फेल हो गए लेकिन बाद में बड़े-बड़े अधिकारी बने और अच्छी नौकरियों में हैं. फेल होने के बाद उन्हें लगा कि अब वह बहुत कुछ करेंगे और उन्होंने वह करके भी दिखाया.

सागर की बात करें तो यहां कक्षा दसवीं की लगभग 96000 कॉपियों का मूल्यांकन किया गया तो 12वीं बोर्ड में 1 लाख 31 कॉपियां का मूल्यांकन किया गया है. सागर मध्य प्रदेश में दसवीं की कॉपियों को चेक करने के मामले में प्रदेश में दूसरे नंबर पर और 12वीं बोर्ड की परीक्षाओं का मूल्यांकन करने में 5 वे नंबर पर रहा हैं. 31 मार्च को ही दोनों कक्षाओं कॉपियों का मूल्यांकन पूरा हो गया था. अब 15 अप्रैल के आसपास परीक्षा परिणाम घोषित किया जा सकता है.



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