क्या गंभीर छोड़ने वाले हेड कोच का पद, KKR को मिली लाइफटाइम जोड़ने की सलाह

क्या गंभीर छोड़ने वाले हेड कोच का पद, KKR को मिली लाइफटाइम जोड़ने की सलाह


नई दिल्ली. आईपीएल 2026 का दूसरा हफ्ता शुरू होते ही केकेआर एक गहरे संकट में फंसती नजर आ रही है. अंक तालिका में निचले पायदान पर मौजूद टीम के प्रदर्शन ने न सिर्फ फैंस बल्कि क्रिकेट जगत को भी चिंता में डाल दिया है. इसी बीच आईपीएल के संस्थापक ललित मोदी के एक तीखे बयान ने बहस को और हवा दे दी है. ललित मोदी ने साफ कहा “गौतम गंभीर को वापस लाने के लिए जो भी करना पड़े, करो. उन्हें स्टॉक ऑप्शन दो, उन्हें टीम का हिस्सा नहीं बल्कि हिस्सेदार बनाओ. यह कोई भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट के आर्किटेक्ट की रणनीतिक सलाह है.

केकेआर के लिए इस सीजन की शुरुआत किसी बुरे सपने से कम नहीं रही चार मैचों में सिर्फ एक अंक वह भी बारिश की वजह से. मुंबई इंडियंस के खिलाफ 220 रन बनाने के बावजूद हार,ईडन गार्डन्स में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 65 रन से करारी शिकस्त,पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच बारिश में धुला, लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ आखिरी गेंद पर हार, टीम फिलहाल नौवें स्थान पर है और हालात इतने खराब हैं कि ईडन गार्डन्स जैसे ऐतिहासिक मैदान में भी दर्शकों की संख्या कम होती दिख रही है.जब कोलकाता का दर्शक शांत हो जाए, तो यह सिर्फ हार नहींएक पहचान का संकट होता है.

गौतम गंभीर: जिसने बदली थी केकेआर की किस्मत

गौतम गंभीर का नाम केकेआर की पहचान से जुड़ा हुआ है2011 में कप्तान बने, 2012 और 2014 में टीम को चैंपियन बनाया, 2024 में मेंटर बनकर लौटे और फिर खिताब जिताया, वह आईपीएल इतिहास के इकलौते व्यक्ति हैं जिन्होंने कप्तान और मेंटर दोनों रूप में ट्रॉफी जीती.लेकिन उनके जाने के बाद 2025 में टीम प्लेऑफ से बाहर,2026 में अब तक नौवें स्थान परयह आंकड़े खुद बताते हैं कि “गंभीर इफेक्ट” कितना बड़ा है.

ललित मोदी का “इक्विटी मॉडल” क्या है?

मोदी का सुझाव सिर्फ कोचिंग तक सीमित नहीं है उनका कहना है कि गंभीर को फ्रेंचाइजी में हिस्सेदारी दी जाएबिल्कुल वैसे ही जैसे शेन वॉर्न राजस्थान रॉयल्स के साथ जुड़े थे. इस मॉडल के फायदे बहुत है.भावनात्मक जुड़ाव,लंबी अवधि की स्थिरता,टीम की स्पष्ट पहचान. मोदी का मानना है कि जैसे MS Dhoni चेन्नई सुपर किंग्स की पहचान हैं, वैसे ही गंभीर केकेआर की आत्मा हैं. सबसे बड़ी बाधा टीम इंडिया की जिम्मेदारी है क्योंकि गभीर भारतीय टीम के हेड कोच हैं और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जीत चुके हैं,2026 टी20 वर्ल्ड कप भी जीत चुके हैं और उनका कॉन्ट्रैक्ट 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक है. हालांकि,खुद गंभीर का मानना है कि केकेआर ने मुझे वो लीडर बनाया, जिसकी वजह से मैं टीम इंडिया का कोच बना. यानी यह रिश्ता अभी भी मजबूत है बस समय का इंतजार है।

क्या केकेआर इंतजार करेगा या मौका गंवाएगा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान रॉयल्स पहले ही गंभीर को पार्टनर, मेंटर और CEO जैसी बड़ी भूमिका ऑफर कर चुका है. यानी मांग बहुत ज्यादा है अब फैसला केकेआर को करना है. क्या वे आगे बढ़कर गंभीर को वापस लाएंगे या किसी और फ्रेंचाइजी को यह मौका दे देंगे? सिर्फ रणनीति नहीं, “पहचान” का सवालआज के आईपीएल में डेटा, एनालिटिक्स और सपोर्ट स्टाफ बेहद अहम हैं लेकिन केकेआर का मौजूदा प्रदर्शन यह दिखाता है कि सिर्फ सिस्टम से काम नहीं चलता.

क्रिकेट भावनाओं का खेल है और जब ईडन गार्डन्स की आवाज धीमी पड़ जाए, तो समस्या आंकड़ों की नहीं, आत्मा की होती है. ललित मोदी का बयान सिर्फ एक राय नहीं, बल्कि एक चेतावनी है. अगर केकेआर ने गंभीर को स्थायी रूप से नहीं जोड़ा, तो वे सिर्फ एक कोच नहीं खोएंगेवे अपनी पहचान खो देंगे. आईपीएल जैसी लीग में सबसे बड़ी गलती वही होती है, जो समय पर फैसला न लेने से हो जाती है. केकेआर के लिए घड़ी टिक-टिक कर रही है अब देखना यह है कि वे इतिहास से सीखते हैं या उसे दोहराते हैं.



Source link