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Manpreet Gony unsung hero: आईपीएल के पहले एडिशन में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए अपनी रफ्तार और उछाल से तहलका मचाने वाले मनप्रीत गोनी रातोंरात भारतीय क्रिकेट के नए सितारे बनकर उभरे थे. धोनी के भरोसे और शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें तुरंत टीम इंडिया में जगह मिली, लेकिन यह सफर केवल दो वनडे मैचों तक ही सिमट कर रह गया. चोट और खराब फॉर्म के कारण वह दोबारा कभी नीली जर्सी नहीं पहन सके और आज वह भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे ‘अनसंग हीरो’ माने जाते हैं जिनकी चमक जितनी तेज थी उतनी ही जल्दी धुंधली भी हो गई.
मनप्रीत गोनी आईपीएल के पहले एडिशन की खोज रहे थे.
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कई खिलाड़ी आए, जिन्होंने अपनी रफ्तार और प्रतिभा से रातों-रात सुर्खियां बटोरीं. लेकिन वक्त की ढलती सुनहरी शाम के साथ वे कहीं ओझल हो गए. इन्हीं नामों में से एक नाम है मनप्रीत गोनी. पंजाब का वह गबरू जवान, जिसकी कद-काठी और शानदार गेंदबाजी ने कभी महेंद्र सिंह धोनी का भरोसा जीता था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. साल 2008 भारतीय क्रिकेट के लिए एक क्रांतिकारी साल था, क्योंकि इसी साल ‘इंडियन प्रीमियर लीग’का आगाज हुआ था. जब चेन्नई सुपर किंग्स की टीम मैदान पर उतरी, तो सबकी निगाहें बड़े सितारों पर थीं, लेकिन एमएस धोनी की कप्तानी में एक नया सितारा चमकने के लिए तैयार था. वह थे मनप्रीत सिंह गोनी.
मनप्रीत गोनी (Manpreet Gony) ने उस सीजन में अपनी धारदार गेंदबाजी और विकेट लेने की क्षमता से सबको हैरान कर दिया. उन्होंने 16 मैचों में 17 विकेट चटकाए और वह सीजन के सबसे सफल भारतीय तेज गेंदबाजों में से एक बनकर उभरे. गोनी के पास न केवल अच्छी खासी गति थी, बल्कि उनके पास गेंद को बाउंस कराने की भी गजब की काबिलियत थी. उनकी इसी कामयाबी ने उन्हें रातों-रात टीम इंडिया के दरवाजे तक पहुंचा दिया.
मनप्रीत गोनी दो वनडे खेलने के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट से गायब हो गए.
नीली जर्सी का सपना और वो दो वनडे मैच
आईपीएल 2008 के ठीक बाद, चयनकर्ताओं ने उन्हें एशिया कप के लिए भारतीय टीम में शामिल किया. जून 2008 में हांगकांग के खिलाफ उन्होंने अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया. इसके बाद उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ खेलने का मौका मिला. हालांकि, इन दो मैचों में वे कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ सके और केवल 2 विकेट ही ले पाए. विडंबना देखिए कि जिस खिलाड़ी को भविष्य का सितारा माना जा रहा था, उसे केवल दो मैचों के बाद टीम इंडिया से बाहर कर दिया गया. किसी को अंदाजा नहीं था कि पाकिस्तान के खिलाफ कराची में खेला गया वह मैच गोनी के करियर का आखिरी इंटरनेशनल मुकाबला साबित होगा.
चोटें, खराब फॉर्म और टीम से दूरी
मनप्रीत गोनी के करियर की ढलान के पीछे सबसे बड़ी वजह ‘चोट’ और ‘निरंतरता की कमी’ रही. आईपीएल के पहले सीजन जैसी फॉर्म वह दोबारा नहीं दोहरा सके. अगले कुछ सालों में उन्होंने डेक्कन चार्जर्स, किंग्स इलेवन पंजाब और गुजरात लायंस जैसी टीमों के लिए खेला, लेकिन वह पुरानी धार गायब थी. घरेलू क्रिकेट में पंजाब के लिए उन्होंने अच्छा प्रदर्शन जारी रखा, लेकिन भारतीय टीम में वापसी के लिए वह काफी नहीं था. गोनी की कहानी उन खिलाड़ियों की याद दिलाती है जो आईपीएल की चमक-धमक में चमके तो बहुत तेज, लेकिन इंटरनेशनल स्टेज के दबाव और फिटनेस की चुनौतियों का सामना नहीं कर पाए.
एक ऑलराउंडर की झलक और आखिरी सफर
गोनी केवल गेंद से ही नहीं, बल्कि बल्ले से भी बड़े शॉट लगाने के लिए जाने जाते थे. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और आईपीएल के कुछ मैचों में उन्होंने अपनी तूफानी बल्लेबाजी का नमूना पेश किया था.लेकिन भारतीय टीम में बतौर ऑलराउंडर स्थापित होने के लिए उन्हें जिस निरंतरता की जरूरत थी, वह उन्हें हासिल नहीं हो पाई. साल 2019 में, मनप्रीत गोनी ने भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास का ऐलान कर दिया. संन्यास के बाद उन्होंने विदेशी टी20 लीग्स (जैसे ग्लोबल टी20 कनाडा और लंका प्रीमियर लीग) में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने अपनी पावर-हिटिंग से एक बार फिर दर्शकों का मनोरंजन किया.
अनकही दास्तां
मनप्रीत गोनी की कहानी भारतीय क्रिकेट के उस दौर का हिस्सा है जहां आईपीएल ने टैलेंट को मंच तो दिया, लेकिन उस टैलेंट को इंटरनेशनल स्तर पर लंबे समय तक टिकाए रखना एक बड़ी चुनौती थी. भले ही रिकॉर्ड बुक में उनके नाम के आगे केवल 2 वनडे मैच दर्ज हों, लेकिन वह इस बात के गवाह हैं कि मेहनत और एक अच्छे आईपीएल सीजन के दम पर अर्श तक पहुंचा जा सकता है. बस, उस ऊंचाई को बरकरार रखना ही असली खेल है.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें